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TMC ने 31 सीटों के चुनावी नतीजों को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, कहा- जीत का अंतर कटे हुए वोटों से कम

West Bengal Election Results
West Bengal Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक उलटफेर और सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अब हार के लिए तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान TMC ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के कारण राज्य की कम से कम 31 सीटों के परिणाम सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
 
पार्टी का तर्क है कि यदि इन सीटों पर वोटरों के नाम नहीं कटते, तो बंगाल में आज सत्ता की तस्वीर कुछ और होती। वरिष्ठ वकील और सांसद कल्याण बनर्जी ने टीएमसी का पक्ष रखते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। बनर्जी ने कहा कि 31 सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर उन वोटरों की संख्या से कहीं कम है, जिन्हें SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
 
इस सूची में ममता बनर्जी की सीट भवानीपुर भी शामिल है। TMC का दावा है कि यहां भी जीत का अंतर कटे हुए वोटों की तुलना में बहुत कम रहा। उन्होंने एक विशेष सीट का हवाला देते हुए कहा कि एक सीट पर हमारी हार मात्र 862 वोटों से हुई, जबकि वहां SIR के कारण 5432 वोट काट दिए गए थे।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का रुख?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना, लेकिन स्पष्ट किया कि इस मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। बेंच ने कहा कि ममता बनर्जी और उन सभी 31 सीटों के उम्मीदवार, जो इस विसंगति से प्रभावित हुए हैं, अलग से चुनावी याचिका (Election Petition) दायर कर सकते हैं।
 
वकील ने जस्टिस बागची की उस पुरानी टिप्पणी की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि 'डिलीट' हुए वोटों की संख्या जीत के अंतर से अधिक होती है, तो उसका न्यायिक परीक्षण (Judicial Scrutiny) किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया और पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाई है। राज्य स्तर पर भाजपा और TMC के बीच कुल 32 लाख वोटों का अंतर रहा है, लेकिन 31 विवादित सीटों पर यह मुकाबला बेहद कड़ा था।

क्या है SIR विवाद?

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल शुरू से ही हमलावर रहे हैं। उनका आरोप है कि पहचान सत्यापन के नाम पर एक विशेष वर्ग और विचारधारा के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। अब सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद, यदि ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करती हैं, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है। बंगाल में दोनों चरणों में 90% से अधिक की रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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