1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. The Politics of nationalism over Vande Mataram!

वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

politics of nationalism surrounding Vande Mataram; Amit Shah on Vande Mataram; Shivraj Singh Chouhan on Vande Mataram; nationalism and Vande Mataram; the Vande Mataram controversy.वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत
भारतीय जनता पार्टी के वंदे मातरम पर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस के वंदे मातरम के केवल एक अंतरे (दो पद) को पार्टी के कार्यक्रमों के गाने के फैसले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के तीखे हमले के बाद इस पर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले  रही है। कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर यह फ़ैसला ऐसे समय किया जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में भाजपा ने सोनिया गांधी पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगाया था। 

कांग्रेस वर्किंग कमेटी में वंदे मातरम के गाने के फैसले पर गृहमंत्री अमित शाह की आपत्ति पर  कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दिखावटी राष्ट्रवाद का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे है।

वंदे मातरम पर विवाद की शुरुआत कैसे?- वंदे मातरम पर नए विवाद पर स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम मे वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी के व्यवहार को लेकर हुई। भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम को बीच में रोकने की कोशिश की। इसके बाद बुधवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के नेताओं ने वंदे मातरम के गायन का मुद्दा उठाया था।

बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो पद गाने की बात कही। इसके लिए खरगे ने  28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्ताव का हवाला दिया।

दरअसल 1937 में कोलकाता मे हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वंदेमातम को लेकर चर्चा हुई और एक प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव को तैयार करने में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नेताओं की भूमिका थी। यह प्रस्ताव गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तैयार किया गया था।

25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत होगा। उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ में भी पांच में से केवल एक अंतरे को राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया है।

अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ा- कांग्रेस कार्यसमिति में वंदेमातरम पर हुए इस फैसले को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ दिया। मीडिया एजेंसी से चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि "कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक आश्चर्यजनक और देशविरोधी फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी के 1937 के रिजोल्यूशन को फॉलो करते हुए महान वंदे मातरम् गीत के दो ही छंद गाने का फैसला लिया है"।

अमित शाह ने आगे कहा कि "मैं पूरे देश को याद दिलाना चाहता हूं, 1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े कर देश के विभाजन की नींव डाली थी और वहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली थी। अंततोगत्वा देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ। आज जब उस ऐतिहासिक गलती को वंदे मातरम् गीत के प्राकट्य के 150वें साल में सुधार कर बंकिम बाबू की इस अमर कृति को पूरा गीत गाकर राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है, और सभी सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय किया गया है और इस निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया गया है। इसी की अवहेलना करने का निर्णय कांग्रेस ने कल किया है"।

अमित शाह ने आगे कहा कि "कांग्रेस का यह निर्णय केवल और केवल इनकी घोर तुष्टिकरण की नीति की पुष्टि करता है। वोट बैंक के लिए इन्होंने न सिर्फ बंकिम बाबू की इस अमर कृति का अपमान किया, बल्कि उन लाखों शहीदों का भी अपमान किया, जो वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए देश की आजादी के लिए फांसी पर चढ़ गए।  आज कांग्रेस पार्टी 1937 के अपनी पार्टी के रिजोल्यूशन को मान रही है और पार्लियामेंट के एक्ट को नकार रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर एक बार तुष्टिकरण की राजनीति को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ा रही है"।

वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के खिलाफ तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि वंदे मातरम को अधूरा गाने का फैसला देश की भावना और राष्ट्रगीत का अपमान है। उन्होंने कहा  कि यह किसी पार्टी का नहीं बल्कि भारत माता के सम्मान का प्रश्न है। शिवराज सिंह ने कहा कि जो गीत स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा, उसे पूरा गाना हर भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ दल देश की एकता और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को भी राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ देते हैं।

कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार-भाजपा के वंदे मातरम के मुद्दें को राजनीतिक तूल देने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर एक अलग राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे का राजनीतिकरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों और सरकार की कथित नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है, जिसमें छात्रों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पूरे विवाद में कानूनी पहलू सामने रखा है। कानून को उसकी मौजूदा स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर बताया। सिंघवी के मुताबिक मौजूदा कानून सरकारी आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन से जुड़ी बात करता है। पार्टी के आंतरिक कार्यक्रमों के बारे में उसमें वैसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। यही तर्क कांग्रेस के उस फैसले को समझने की कोशिश में अहम हो जाता है, जिस पर अब पार्टी के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है।
लेखक के बारे में
विकास सिंह
special correspondent.... और पढ़ें
अगला लेख
LIVE: संसद मार्ग पुलिस थाने पर राहुल गांधी का धरना, पैलेट गन मामले में FIR की मांग