1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. tarun-tejpal-convicted-sexual-assault-case-bombay-high-court-2026

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा, जानिए क्या है पूरा मामला

Tarun Tejpal Conviction
Tarun Tejpal Convicted: खोजी पत्रकारिता के लिए विख्यात मैगजीन 'तहलका' के संस्थापक और पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मई 2021 में निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया। कोर्ट ने उन्हें IPC की धारा 376 (2) (f) समेत अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत दोषी ठहराया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा के एक 5-स्टार होटल में 'तहलका' मैगजीन द्वारा एक हाई-प्रोफाइल वार्षिक कार्यक्रम 'थिंक फेस्ट' (Think Fest) आयोजित किया गया था। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुई थीं। कार्यक्रम के दौरान (7 और 8 नवंबर 2013 की मध्यरात्रि) तरुण तेजपाल ने तहलका में ही कार्यरत अपनी एक जूनियर महिला पत्रकार (सहकर्मी) को लिफ्ट के अंदर रोककर उनके साथ दो बार जबरदस्ती की और यौन उत्पीड़न किया।

घटना का खुलासा और 'माफीनामे' का ईमेल

घटना के कुछ दिनों बाद पीड़िता ने संस्थान की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ईमेल भेजकर अपनी आपबीती सुनाई। जब यह मामला सार्वजनिक हुआ, तो मीडिया और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। मामला बढ़ता देख तरुण तेजपाल ने पीड़िता को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने अपने इस कृत्य को एक 'गलती' स्वीकारते हुए माफी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 महीने के लिए 'तहलका' के एडिटर-इन-चीफ पद से हटने की घोषणा की। हालांकि, पीड़िता ने रुख साफ किया कि संस्था के प्रमुख द्वारा इसे महज एक व्यक्तिगत भूल बताकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

22 नवंबर 2013 को गोवा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया और तरुण तेजपाल के खिलाफ दुष्कर्म तथा गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। वह लगभग 8 महीने तक गोवा की जेल में बंद रहे, जिसके बाद जुलाई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल सकी।

सेशंस कोर्ट का फैसला और विवाद

मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत (सेशंस कोर्ट) ने इस मामले में तरुण तेजपाल को 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था। सेशंस कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के घटना के बाद के आचरण पर सवाल खड़े किए थे, जिसकी देशभर के कानूनी विशेषज्ञों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता ने तीखी आलोचना की थी। निचली अदालत के इस विवादित फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने तुरंत बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में अपील दाखिल की।

बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त रुख

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ ने गोवा सरकार और अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत का फैसला तथ्यों और कानून के सिद्धांतों के विपरीत था।

कोर्ट ने इन धाराओं में दोषी पाया

हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को निम्नलिखित धाराओं में दोषी पाया। धारा 376 (2) (f) (अधिकार या नियंत्रण की स्थिति में किसी महिला से दुष्कर्म करना), धारा 354(A) (यौन उत्पीड़न), धारा 354(B) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग)। 

कोर्ट में तेजपाल की नरमी की अपील

फैसले के समय अदालत में मौजूद तरुण तेजपाल ने खुद को प्रताड़ना का शिकार बताया और अपनी उम्र तथा परिवार की स्थिति का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि वह दो बेटियों के पिता हैं। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें कम से कम 10 साल की सजा की श्रेणी में रखा है।
अगला लेख
MYH का अदना सा फार्मासिस्ट कैसे बन बैठा करोड़पति, करोड़ों के प्लॉट, आलीशान बंगला, पूरे महकमे पर उठे सवाल