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Last Updated :नई दिल्ली , सोमवार, 15 सितम्बर 2025 (13:27 IST)

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वक्फ संशोधन कानून के 3 संशोधन पर रोक, कलेक्टर नहीं करेंगे फैसला

supreme court
Supreme court waqf law decision : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ कानून पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि पूरे वक्फ कानून पर स्टे करने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगाई। अदालत ने कहा कि वक्फ संपत्ति का फैसला कलेक्टर नहीं ट्रिब्यूनल करेगा ।
 
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 11 सदस्यीय बोर्ड का सीईओ भी मुस्लिम होना चाहिए। वक्फ बोर्ड में 3 से ज्यादा गैर मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे। अदालत ने कहा कि कलेक्टर वक्फ संपत्ति का फैसला नहीं कर सकते। यह ट्रिब्यूनल के पास जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के उस प्रावधान पर रोक लगा दी है जिसके तहत वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति को 5 साल तक इस्लाम का अनुयायी होना जरूरी था। कोर्ट ने कहा है कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा जब तक यह तय करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।

अदालत ने उस प्रावधान पर भी रोक लगा दी जो सरकार द्वारा नामित किसी अधिकारी को यह तय करने का अधिकार देता है कि जो वक्फ संपत्ति है वह वास्तव में सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण है या नहीं।
 
supreme court waqf board decision
प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने वक्फ मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद 22 मई को इन मुद्दों पर अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था।
 
पीठ ने पहले उन तीन मुद्दों की पहचान की थी, जिन पर याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम आदेश के जरिये रोक लगाने का अनुरोध किया था। अधिसूचना रद्द करने के मुद्दे के अलावा, याचिकाकर्ताओं ने राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना पर भी सवाल उठाए हैं, उनका तर्क है कि बोर्ड और परिषद में केवल मुसलमानों को ही शामिल किया जाना चाहिए।
 
तीसरा मुद्दा उस प्रावधान से संबंधित है, जिसके अनुसार, जब कलेक्टर यह पता लगाने के लिए जांच करता है कि संपत्ति सरकारी है या नहीं, तो वक्फ संपत्ति को वक्फ नहीं माना जाएगा।
 
केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को पांच अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचित किया था। लोकसभा ने इस विधेयक को तीन अप्रैल को 288 सदस्यों के समर्थन से पारित कर दिया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। राज्यसभा ने चार अप्रैल को इस विधेयक को पारित किया। राज्यसभा में इसके पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 सदस्यों ने मतदान किया।
edited by : Nrapendra Gupta 
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