सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कहा- SIR कराना चुनाव आयोग का अधिकार, प्रक्रिया गैर-संवैधानिक नहीं
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि SIR कराना चुनाव आयोग का अधिकार है। चुनाव आयोग ने अपने अधिकार के बाहर काम नहीं किया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए 'अल्ट्रा वायर्स' (गैर-कानूनी) कहकर रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वोटर लिस्ट के आम रिवीजन की प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट ने SIR को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया है। कोर्ट ने आगे कहा कि यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि एसआईआर के दौरान नियमों के विरुद्ध नाम नहीं काटे गए। इसका मकसद लोगों को मतदाता सूची से बाहर करना नहीं। इस प्रक्रिया में कोई खामी नहीं।
क्या बोले याचिकाकर्ता?
याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने SIR ऊपर फैसला सुनाया है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR की प्रक्रिया पूरी सही है और SIR कराना चुनाव आयोग का काम है उन्होंने जो कराया वो बिल्कुल ठीक कराया है। जो SIR के बारे में बहुत सारी कमियां बताई गई थीं सुप्रीम कोर्ट ने उस कमियों को स्वीकार नहीं किया है और कहा कि चुनाव आयोग फेयर तरीके से SIR कराया है।
उन्होंने कहा कि हमने याचिका जो की थी उसमें मांग किया था कि SIR नियमित अंतराल पर होना चाहिए। SIR हर 5 साल में होते रहना चाहिए क्योंकि एक भी विदेशी व्यक्ति का नाम है तो वो पूरी तरीके से चुनाव आयोग के खिलाफ है आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारी और चुनाव आयोग की दलील थी उसको स्वीकार कर लिया है और जो SIR के खिलाफ और उसके कमी के बारे में याचिक फाइल की गई थी उसे नकार दिया है। मैं आशा करता हूं कि आने वाले समय में घुसपैठिए और बांग्लादेशी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं होगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मामले में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को आधार कार्ड को एसआईआर के लिए अनिवार्य (12वें दस्तावेज के रूप में) दस्तावेज में शामिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आधार नागरिक का प्रमाण नहीं होगा और चुनाव आयोग के आधार कार्ड का सत्यापन करा सकेगा।
edited by : Nrapendra Gupta
