Malda violence मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को लगाई फटकार, 26 गिरफ्तार लोगों से NIA करेगी पूछताछ
पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंदी बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस घटना को 'पूर्व-नियोजित और प्रेरित' करार देते हुए मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में 'स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 26 लोगों से एनआईए को पूछताछ करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को भी आड़े हाथों लिया। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन न उठाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए उन्हें माफी मांगने का निर्देश दिया। इस घटना के बाद से राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है।
क्या था पूरा मामला
पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल के कालियाचक (मालदा) में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में एक उग्र भीड़ ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त सात न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया था। यह घटना उस समय हुई जब राज्य में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है।
क्या कहा तृणमूल कांग्रेस ने
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनाव रोकने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष एक घटना को तूल देकर पूरे राज्य की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हुई न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना में शामिल होने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
पीएम ने ममता सरकार पर साधा था निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव किए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को भाजपा की प्रचार रणनीति का केंद्र बिंदु बनाते हुए इस घटना को तृणमूल कांग्रेस का महा जंगलराज करार दिया। उन्होंने 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए 'भय' और भाजपा के 'भरोसे' के बीच सीधा मुकाबला बताया। Edited by : Sudhir Sharma