1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. supreme-court-cji-surya-kant-clarification-cjp-neet-protest-media-reporting

NEET प्रदर्शन विवाद : पुलिस लाठीचार्ज वाली याचिका मामले में क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?

cji suryakant
CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में सुनवाई को लेकर मीडिया में चल रही खबरों का सख्ती से खंडन किया है। CJI ने उन दावों को पूरी तरह भ्रामक और 'लापरवाह' करार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर हुई पुलिस ज्यादती पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
 
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत ने किसी भी याचिका को खारिज नहीं किया है, क्योंकि इस संबंध में कोई औपचारिक केस या याचिका दायर ही नहीं की गई थी। ALSO READ: CJI बोले- वीडियो देखने का वक्त नहीं, हमारा समय बर्बाद न करें, CJP प्रोटेस्ट में लाठीचार्ज पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित 'चलो संसद' मार्च से शुरू हुआ था। NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और व्यापक शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्रों और कार्यकर्ताओं ने संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की थी।
 
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े बैरिकेड्स लगाए और स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी छात्र घायल हो गए थे। ALSO READ: लंदन में CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा क्यों हुआ, Cockroach Janta Party ने क्या कहा

मौखिक टिप्पणी से उपजा भ्रम

घटना के बाद, 22 जुलाई को अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक 'लेटर पिटीशन' का उल्लेख (mentioning) किया था। उन्होंने पीठ से पुलिस कार्रवाई के वीडियो फुटेज देखकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने का अनुरोध किया।
 
उस समय CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमारा और अपना समय बर्बाद न करें। हमें वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास इसके लिए समय नहीं है। इस मौखिक टिप्पणी के आधार पर मीडिया के एक वर्ग में यह खबरें चलने लगीं कि देश की शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ दायर मामले को सुनने से साफ इनकार कर दिया है। ALSO READ: CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी, कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह हैं, व्यवस्था पर हमला करते हैं

क्या है CJI का स्पष्टीकरण

भ्रामक रिपोर्टिंग पर कड़ा रुख अपनाते हुए CJI सूर्यकांत ने स्थिति साफ की। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, CJI ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई मामला तकनीकी रूप से कोर्ट के समक्ष दायर ही नहीं होता, तब तक उसे खारिज या लिस्ट करने से मना करने का सवाल ही नहीं उठता।
 
CJI ने मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इसका सिर्फ जिक्र किया था। मीडिया ने गलत तरीके से रिपोर्ट किया कि मैंने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है। वह केवल एक प्रतिवेदन था और लोगों ने बिना सोचे-समझे रिपोर्टिंग शुरू कर दी। मैंने रजिस्ट्री से जांच कराई है—इस मामले में एक भी कागज (याचिका) दाखिल नहीं किया गया था।
 
दरअसल, वकील द्वारा केवल एक मौखिक उल्लेख किया गया था और रजिस्ट्री में कोई विधिवत जनहित याचिका (PIL) दर्ज नहीं थी। अदालत के रुख से साफ है कि यदि भविष्य में नियम और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत कोई औपचारिक याचिका (Petition) दाखिल की जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट सामान्य प्रक्रिया के तहत उस पर विचार कर सकता है।
अगला लेख
दिल्ली में Gen-Z का ‘मीम वार’, NEET लीक के खिलाफ सड़कों पर शेयर हुआ क्रिएटिविटी और ह्यूमर का डोज