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असम और बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR वापस, क्या बोली दिल्ली पुलिस?

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असम की हिमंता बिस्वा सरकार और बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस लेने का एलान किया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया कि जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। ALSO READ: बुरा मत मानिए, आईना हमेशा सुंदर नहीं होता…
 
दिल्ली पुलिस का कहना है कि केवल उन ही मामले में एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर संबंधी मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
 

क्या है बिहार सरकार का फैसला

बिहार सरकार ने कहा है कि 26 जुलाई की शाम छह बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकी, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। आंदोलन में नामित लोगों के खिलाफ भविष्य में भी कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में
 

असम में रिहा होंगे प्रदर्शनकारी

असम के राज्य के गृह विभाग ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। कानून के अनुसार मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि गिरफ्तारियों की समीक्षा की जाएगी और हिरासत में लिए गए लोगों को जरूरी प्रक्रियाओं के बाद रिहा कर दिया जाएगा। 26 जुलाई को शाम 6 बजे तक पुलिस ने राज्य में 5 मामले दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया था।
 

सीजेपी की चेतावनी

गौरतलब है कि काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में प्रेस कान्फ्रेंस कर प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज आपराधिक मामलों को वापस नहीं लिए जाने पर नाराजगी जताई थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि मंगलवार तक मांग पूरी न हुई तो फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ALSO READ: CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड
 

सिब्बल ने जताई आशंका

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस आंदोलनकारी छात्रों को अपना निशाना बना सकती है। जहां-जहां छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, वहां-वहां उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की, ताकि कानूनी लड़ाई प्रभावी ढंग से लड़ी जा सके।
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