भारत रणभूमि दर्शन की शुरुआत, सिक्किम में भारत-चीन संघर्ष स्थल बना बैटलफील्ड टूरिज्म
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध के आठ साल बाद, सिक्किम के डोकलाम को सोमवार को केंद्र सरकार की भारत रणभूमि दर्शन पहल के तहत औपचारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक डोकलाम के साथ-साथ चो-ला (Cho-La) जो 1967 में दोनों देशों के बीच संघर्ष का स्थल रहा था, को भी पर्यटन के लिए खोला गया है।
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने गंगठोक से 25 मोटरसाइकिलों और वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा, “चो-ला और डोक-ला का खुलना वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को मजबूत करना और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करना है” यह पहल बैटलफील्ड टूरिज्म (रणभूमि पर्यटन) की अवधारणा के तहत की गई है, ताकि आगंतुकों में देशभक्ति की भावना जगाई जा सके और सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
डोकलाम जो 13,780 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, भूटान, चीन और भारत के ट्राइ-जंक्शन पर चुंबी घाटी में एक पठार है। जून 2017 में यह क्षेत्र एक बड़ा फ्लैशपॉइंट बन गया था जब चीन ने यहां सड़क बनाने का प्रयास किया था। वहीं, चो-ला 17,780 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। सिक्किम के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन) सी. सुधाकर राव ने बताया कि सेना के साथ मिलकर यहां कैफेटेरिया, पार्किंग और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं।
क्या महत्व है : यह केंद्र सरकार के 'भारत रणभूमि दर्शन' का हिस्सा है, जो देश भर के 77 ऐतिहासिक सैन्य स्थलों को विकसित करने की एक बड़ी योजना है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे (कैफेटेरिया, शौचालय, पार्किंग) विकसित किए जा रहे हैं और सेना के साथ समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। यह कदम चीन को एक स्पष्ट संदेश देता है और भारत की रणनीतिक लचीलापन और सैन्य शक्ति को दर्शाता है, जिससे ये स्थान अब सैन्य इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का मिश्रण पेश करते हैं।
Edited By: Navin Rangiyal