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मां के आंसूओं को थामने राष्ट्रपति को तोड़ना पड़ा प्रोटोकाल, शहीद बेटे का कीर्ति चक्र लेते ही फूटफूट कर रोईं मां, मुर्मू ने लगाया गले
कुलगाम में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे जंजाल प्रवीण प्रभाकर
राष्ट्रपति भवन में 51 जाबांजों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने के मौके पर एक बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया। इस दौरान एक शहीद बेटे की मां अपने बेटे के लिए कीर्ति चक्र लेते समय इतनी भावुक हुईं कि वे राष्ट्रपति मुर्मू के गले लगकर बिलख पड़ीं। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर कोई भावुक हो गया और उनकी आंखें नम हो गईं।
दरअसल, इस आयोजन में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीद सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी मां ने रिसीव किया। इस दौरान वे अपने बेटे को याद करते हुए पूरी तरह से टूट गईं और राष्ट्रपति के सामने फफक कर रो पड़ीं।
यह दृश्य देखकर सबका दिल पिघल गया : मंच पर सम्मान लेने के दौरान हाथ में कीर्ति चक्र थामे जैसे ही शहीद की मां की नजर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर पड़ी, उनका सब्र का बांध टूट गया। वे फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने राष्ट्रपति के कंधे पर अपना सिर रख दिया। देश की प्रथम नागरिक ने भी प्रोटोकॉल की सीमाओं को परे रखकर एक मां के इस अथाह दर्द को गले से लगा लिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने बेहद आत्मीयता से शहीद की मां को अपने गले लगाया, उनके आंसू पोंछे और उन्हें ढांढस बंधाया।
खुफिया इनपुट और घेराबंदी : यह घटना 6 जुलाई 2024 की है जब सुरक्षा बलों को कुलगाम के फ्रिसल चिन्नीगाम इलाके में भारी हथियारों से लैस खूंखार विदेशी आतंकवादियों के छिपे होने की सटीक खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद सेना की राष्ट्रीय राइफल्स (महार रेजिमेंट) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर एक कार्डन एंड सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।
ऐसे शहीद हुए थे प्रभाकर : इस आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों की कई गोलियां सिपाही प्रवीण प्रभाकर को लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे आखिरी सांस तक लड़ते रहे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने भारत माता की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। बता दें कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आतंकियों की भारी गोलीबारी का डटकर सामना किया था और घेराबंदी को मजबूत रखा और अपनी सटीक पोजीशन से दो खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया।
Edited By: Naveen R Rangiyal
दरअसल, इस आयोजन में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीद सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी मां ने रिसीव किया। इस दौरान वे अपने बेटे को याद करते हुए पूरी तरह से टूट गईं और राष्ट्रपति के सामने फफक कर रो पड़ीं।
51 जाबांजों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने के मौके पर एक बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया। एक शहीद बेटे की मां अपने बेटे के लिए कीर्ति चक्र लेते समय इतनी भावुक हुईं कि वे राष्ट्रपति मुर्मू के गले लगकर बिलख पड़ीं। https://t.co/5r71XeiPdf#protocol pic.twitter.com/XGCmZzATzQ
— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) June 9, 2026
यह दृश्य देखकर सबका दिल पिघल गया : मंच पर सम्मान लेने के दौरान हाथ में कीर्ति चक्र थामे जैसे ही शहीद की मां की नजर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर पड़ी, उनका सब्र का बांध टूट गया। वे फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने राष्ट्रपति के कंधे पर अपना सिर रख दिया। देश की प्रथम नागरिक ने भी प्रोटोकॉल की सीमाओं को परे रखकर एक मां के इस अथाह दर्द को गले से लगा लिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने बेहद आत्मीयता से शहीद की मां को अपने गले लगाया, उनके आंसू पोंछे और उन्हें ढांढस बंधाया।
ऐसे शहीद हुए थे प्रभाकर : इस आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों की कई गोलियां सिपाही प्रवीण प्रभाकर को लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे आखिरी सांस तक लड़ते रहे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने भारत माता की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। बता दें कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आतंकियों की भारी गोलीबारी का डटकर सामना किया था और घेराबंदी को मजबूत रखा और अपनी सटीक पोजीशन से दो खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया।
Edited By: Naveen R Rangiyal
