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राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन मामले में क्या हो सकता है? तीन संभावनाओं पर टिकी नजर
भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को लेकर अब सबकी निगाहें दिल्ली पर टिक गई है। पूरे मामले को लेकर कांग्रेस के चुनाव आयोग के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद आज दोपहर 3 बजे तक समय काफी अहम हो गया है। चुनाव आयोग के निर्णय से न केवल कांग्रेस की चुनावी रणनीति प्रभावित होगी, बल्कि राज्यसभा की तीन सीटों के चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं। वहीं अगर सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले में दखल देता है तो कांग्रेस को एक संजीवनी मिल जाएगी।
पहली संभावना: रिटर्निंग अफसर का फैसला बरकरार- यदि चुनाव आयोग रिटर्निंग अफसर द्वारा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने के फैसले को सही ठहराता है, तो भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो जाएगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से ही रहेगी और पार्टी चुनाव आयोग व रिटर्निंग अफसर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट याचिका स्वीकार करता है, तो चुनावी प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना बन सकती है. जो कांग्रेस के लिए बड़ी राहत भी हो सकती है।
दूसरी संभावना: चुनाव आयोग नामांकन को वैध ठहराए- यदि चुनाव आयोग कांग्रेस की आपत्ति को स्वीकार करते हुए रिटर्निंग अफसर का फैसला रद्द कर देता है, तो मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र मान्य हो जाएगा। इसके बाद राज्यसभा की तीन सीटों के लिए कुल चार उम्मीदवार मैदान में होंगे। ऐसी स्थिति में चुनाव निर्विरोध नहीं रहेगा और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 18 जून को मतदान कराया जाएगा।
तीसरी संभावना: चुनाव आयोग कोई फैसला ही न लें- तीसरी संभावना यह है कि चुनाव आयोग आज दोपहर 3 बजे तक कांग्रेस की शिकायत पर अपन फैसला ही न सुनाएं। यदि दोपहर 3 बजे तक आयोग की ओर से कोई आदेश जारी नहीं होता है, तो कांग्रेस प्रभावी रूप से चुनावी दौड़ से बाहर हो सकती है। भोपाल में रिटर्निंग अफसर चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आज दोपहर 3 बजे के बाद 3 सीटों के लिए तीन ही नामांकन वैद्य पाने का नोटिफिकेशन कर दें। इसके बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा का रास्ता साफ हो जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में पूरे घटनाक्रम पर नजरें टिकी हैं। चुनाव आयोग का फैसला न केवल राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि कांग्रेस की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई आगे किस मोड़ पर जाएगी।
