प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने सोमवार को लोगों से विदेशी आयातित सामानों पर निर्भरता कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से जारी पश्चिम एशिया युद्ध के कारण आयातित वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और वैश्विक सप्लाई चेन भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से रविवार को लोगों से ईंधन का सोच-समझकर उपयोग करने, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राएं कम करने की अपील की थी। गुजरात में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत विदेशों से कई उत्पाद आयात करने के लिए लाखों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च करता है। वहीं, अब आयातित सामानों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो रही है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हो गई है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी देश के लिए बड़े परिणाम ला सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जिस तरह बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, उसी तरह हर छोटा और बड़ा प्रयास महत्वपूर्ण होता है। हमें विदेशों से आने वाले उत्पादों के उपयोग को कम करना चाहिए और रोजमर्रा की जिंदगी में आयातित वस्तुओं पर अनावश्यक निर्भरता से बचना चाहिए। साथ ही, ऐसी व्यक्तिगत गतिविधियों से भी बचना चाहिए जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है।”
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती थी, जबकि पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट इस दशक के सबसे बड़े संकटों में से एक बन गया है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि जैसे भारत ने कोविड महामारी का सफलतापूर्वक सामना किया था, वैसे ही इस संकट से भी देश बाहर निकल आएगा।
मोदी ने कहा कि देश के संसाधनों पर बोझ कम करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी जब देश युद्ध या किसी बड़े संकट से गुजरा है, तब नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि आज भी सभी देशवासियों को एकजुट होकर देशहित में योगदान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
विपक्ष ने क्या कहा
महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच लोगों से खर्चों में कटौती की प्रधानमंत्री नरेन्द्र की अपील पर सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे “नीतिगत विफलता” बताते हुए सरकार पर अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया।
शिवसेना (उबाठा) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार चुनाव में लगी रही और अर्थव्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से खर्चों में कटौती की यह अपील की गई है। चतुर्वेदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नागरिक पहले से ही “चुनाव में लगी सरकार” और खराब विदेश नीति के कारण महंगाई से परेशान हैं।
उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मामले में नीतिगत विफलता हुई है। चुनाव से जुड़े फैसलों का बोझ अब जनता पर नहीं डाला जा सकता और उनसे कहा नहीं जा सकता कि वे तेल बचाएं और यात्राएं या खरीदारी कम करें।”
वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइट क्रैस्टो ने कहा कि जनता से खर्च कम करने की अपील करने से पहले भाजपा को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर भाजपा ऐसा नहीं करती है तो यह सिर्फ लोगों को दिखाने या वाहवाही बटोरने के लिए किया गया एक और दिखावटी काम होगा। ”
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री “कार्यक्रमों, फोटोशूट और चुनावी रैलियों” में व्यस्त हैं, जबकि आम लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि देश में ईंधन और एलपीजी की कमी है और महंगाई ने जनता को बुरी तरह प्रभावित किया है। सपकाल ने लिखा, “देश को एक दूरदर्शी नेता की जरूरत थी, लेकिन इसके बजाय उसे सिर्फ “इवेंट मैनेजर” मिला।”
इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मोदी की अपील का बचाव किया और राहुल गांधी के आरोपों को खारिज कर दिया। दरअसल मोदी की अपील पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गांधी ने एक्स पर लिखा कि नागरिकों से बलिदान की अपील करना सरकार की विफलता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “ये सलाह नहीं है, बल्कि विफलता का प्रमाण है। 12 वर्षों के दौरान देश को ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया गया है कि अब जनता को यह बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं, कहां जाना है और कहां नहीं जाना है।” फडणवीस ने गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के संदेश की “सीमित समझ” है। फडणवीस ने दावा किया कि आम जनता ने प्रधानमंत्री की बात को सही तरह से समझ लिया है और उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने गांधी को देश का “सबसे ज्यादा खारिज किया गया नेता” बताया। Edited by : Sudhir Sharma