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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपए की बढ़ोतरी: दिल्ली में 97 रुपए पार, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर
Petrol Diesel Price Hike : पेट्रोल कंपनियों ने शुक्रवार को देश में पेट्रोल डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। दिल्ली में पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 3.14 रुपए की वृद्धि हुई है, जिससे अब यह बढ़कर 97.77 रुपये हो गई है। इसी तरह, डीजल 3.11 रुपए प्रति लीटर महंगा होकर 90.67 रुपए पहुंच गया है। राजधानी में सीएनजी के दाम 2 रुपए बढ़कर 79.09 रुपए प्रति लीटर हो गए। ALSO READ: Delhi : दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम, पेट्रोल खर्च में कटौती और नो कार डे अभियान शुरू
मुंबई में पेट्रोल 3.14 रुपए की तेजी के साथ 106.68 रुपए प्रति लीटर हो गया। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा 3.29 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। शहर में पेट्रोल की कीमत 108.74 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई। चेन्नई में पेट्रोल 2.83 रुपए बढ़कर 103.67 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है।
इसी तरह मुंबई में डीजल की कीमत 93.14 रुपए प्रति लीटर हो गया। कोलकाता में इसकी कीमत 3.11 रुपए बढ़कर 95.13 रुपए पहुंच गई। चेन्नई में डीजल 2.86 रुपए बढ़कर 95.25 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है।
क्यों बढ़े पेट्रोल डीजल के दाम?
मिडिल ईस्ट संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के आम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने हुए हैं। इस वजह से तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इस नुकसान की भरपाई करने के लिए देश में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
क्या होगा असर?
महंगाई में बढ़ोतरी : डीजल का सबसे बड़ा उपयोग ट्रकों और परिवहन वाहनों में होता है। जब डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है। खेत से मंडी और मंडी से आप तक सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। दूध, फल और पैकेज्ड फूड की कीमतों में भी उछाल आता है।
मध्यम वर्ग के बजट पर असर: पेट्रोल महंगा होने से ऑफिस जाने या निजी काम के लिए गाड़ी इस्तेमाल करने वालों का मासिक खर्च बढ़ जाता है, जिससे उनकी बचत कम हो जाती है। बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए जब RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो होम लोन और कार लोन की EMI भी महंगी हो सकती है।
उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव : कई फैक्ट्रियों में मशीनों और जनरेटरों के लिए ईंधन का उपयोग होता है। लागत बढ़ने से अंततः प्रोडक्ट की कीमत बढ़ जाती है। कच्चे तेल का उपयोग पेंट, प्लास्टिक और केमिकल्स बनाने में होता है, इसलिए इन चीज़ों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर : भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज़्यादा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमज़ोर हो सकता है। सरकार और तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, जिससे विकास कार्यों के लिए फंड कम हो सकता है।
edited by : Nrapendra Gupta
