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पेट्रोल-डीजल के दाम कब घटेंगे? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया पूरा गणित

Petrol Diesel Price
Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट के बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं? इस सवाल का जवाब खुद केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया है। उन्होंने साफ किया है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल के कारण देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को 74 हजार 781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने में थोड़ा वक्त लग रहा है।

कंपनियों ने उठाया भारी नुकसान

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में तेल की कीमतों और सरकारी कंपनियों की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट की। पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची थी।

इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए तेल कंपनियों ने कीमतों में आक्रामक बढ़ोतरी नहीं की। लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (LPG) बेचने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को 30 जून तक की अवधि में कुल 74,781 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। ALSO READ: E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? सरकार ने बताई सचाई, क्या बोलीं बीमा कंपनियां

क्रूड सस्ता होने पर भी क्यों नहीं घट रहे दाम?

आम जनता के मन में यह सवाल है कि जब पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें कम हुई हैं, तो भारत में ईंधन सस्ता क्यों नहीं हो रहा? इस पर तकनीकी कारण समझाते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब निश्चित रूप से कम हुई हैं, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर होने के दौरान महंगे दामों में खरीदा गया था। ALSO READ: पाकिस्तान समेत में कई देशों में सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, भारत में क्यों नहीं मिली राहत? जानिए तेल कंपनियां दाम क्यों नहीं घटा रहीं?
 
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि रिफाइनरी कंपनियां ईंधन उत्पादन के लिए कच्चा तेल आमतौर पर कम-से-कम दो महीने पहले बुक या खरीदती हैं। ऐसे में वर्तमान में जिस कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल बनाया जा रहा है, वह मुख्य रूप से अप्रैल या मई की शुरुआत में खरीदा गया था, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर थीं।

आगे क्या होगा?

पेट्रोलियम मंत्री के इस बयान से साफ है कि जैसे ही महंगे कच्चे तेल का पुराना स्टॉक समाप्त होगा और कंपनियां कम कीमत पर खरीदे गए क्रूड का प्रसंस्करण शुरू करेंगी, वैसे ही उनका वित्तीय घाटा कम होने लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी हफ्तों में वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहता है और तेल कंपनियां अपने पिछले नुकसान की भरपाई कर लेती हैं, तो आगामी तिमाहियों में आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है।
लेखक के बारे में
वृजेन्द्रसिंह झाला
वृजेन्द्रसिंह झाला पिछले 30 से ज्यादा वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।    अनुभव : वृजेन्द्रसिंह झाला तीन दशक से ज्यादा का प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया का अनुभव है। वर्तमान.... और पढ़ें
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