पवन खेड़ा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती, क्या बच पाएंगे गिरफ्तारी से?
Pawan Khera's Appeal to the Supreme Court in Defamation Case : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक कानूनी मामले में राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने 24 अप्रैल को आए गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा पर मानहानि और जालसाजी के आरोप लगाए गए हैं। यह एफआईआर रिनिकी भूयान शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत कुमार बिस्वा सरमा की पत्नी हैं। खेड़ा ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को जल्द सुनवाई की मांग भी की है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनकी भुइयां शर्मा के पास कई देशों के पासपोर्ट है।
असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है मामला
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक कानूनी मामले में राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने 24 अप्रैल को आए गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा पर मानहानि और जालसाजी के आरोप लगाए गए हैं। यह एफआईआर रिनिकी भूयान शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत कुमार बिस्वा सरमा की पत्नी हैं।
असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज किया केस
खेड़ा ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को जल्द सुनवाई की मांग भी की है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनकी भुइयां शर्मा के पास कई देशों के पासपोर्ट है। विदेश में उनकी अघोषित संपत्ति है, जिसका जिक्र उनके चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इन बयानों के बाद रिनिकी भूयान शर्मा ने इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ केस दर्ज किया।
फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अब खेड़ा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और वहां से राहत की उम्मीद जताई है। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इससे पहले खेड़ा को एक सप्ताह के लिए सीमित पारगमन अग्रिम जमानत दी थी। न्यायालय ने पाया कि उनकी गिरफ्तारी की आशंका उचित और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से समर्थित प्रतीत होती है, साथ ही जांच में सहयोग करने और जांच को प्रभावित कर सकने वाले सार्वजनिक बयानों से परहेज करने जैसी शर्तें भी लगाईं।
फिर असम सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि खेड़ा ने असम की अदालतों को दरकिनार करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया है, जहां मामला दर्ज किया गया था। पिछली सुनवाई के दौरान, अभिषेक मनु सिंहवी के नेतृत्व में खेरा के वकील ने तर्क दिया कि उनके भागने का कोई खतरा नहीं है और गिरफ्तारी अनावश्यक है, साथ ही उन्होंने इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर
यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि शीर्ष अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और पवन खेड़ा को राहत मिलती है या नहीं?
Edited By : Chetan Gour
Edited By : Chetan Gour

