पाकिस्तान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री ने की ISRO के Chandrayaan 2 मिशन की तारीफ

पुनः संशोधित मंगलवार, 10 सितम्बर 2019 (08:56 IST)
भारत और (Pakistan) के बीच कश्मीर को लेकर भले ही तनाव हो, लेकिन अंतरिक्ष में कोई सरहदें नहीं हैं। इमरान के मंत्री भले ही चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) मिशन को लेकर बेवकूफी भरे बयान दे रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री नामिरा सलीम (Namira salim) ने भारत और इसरो को चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) मिशन के लिए बधाई दी है। दूसरी ओर चीन भी Chandrayaan 2 पर भारत को बधाई दी है।
क्या कहा नामिरा ने : नामिरा ने कहा है कि चंद्रमा पर लैंडिंग का प्रयास करना ही अपने आप में दक्षिण एशिया के साथ ही पूरे वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक 'बड़ी छलांग' है। सलीम अंतरिक्ष में जाने वाली पहली पाकिस्तानी हैं।
वे सर रिचर्ड ब्रैनसन के वर्जिन गैलेक्टिक से अंतरिक्ष में गई थीं। नामिरा ने कराची की पत्रिका 'साइंशिया' को कहा कि 'मैं भारत और इसरो को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की एक सफल सॉफ्ट लैंडिंग कराने के उसे ऐतिहासिक प्रयास के लिए बधाई देती हूं।
Chandrayaan 2 मिशन वास्तव में दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी छलांग है, जो न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग को गौरवान्वित बनाता है।
नामिरा ने कहा कि दक्षिण एशिया में अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास शानदार है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन देश अंतरिक्ष में आगे बढ़ता है, सभी राजनीतिक सीमाएं मिट जाती हैं और अंतरिक्ष में हमें एकजुट करती हैं, जो हमें पृथ्वी पर विभाजित करती हैं।
चीन ने बताया महान प्रयास : भारत के पड़ोसी देश चीन के लोगों ने भारत के दूसरे चंद्रमिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की इंटरनेट पर काफी सराहना की है और उनसे उम्मीद न छोड़ने और ब्रह्मांड में खोज जारी रखने को कहा है।
चीनी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट 'साइना वीबो' पर भारतीय वैज्ञानिकों से उम्मीद न छोड़ने को कहा। एक चीनी इंटरनेट यूजर ने कहा कि 'अंतरिक्ष खोज में सभी मनुष्य शामिल हैं। इससे फर्क नहीं पड़ता कि किस देश को सफलता मिली।
इसे हमारी प्रशंसा मिलनी चाहिए और जो अस्थायी रूप से विफल हुए हैं, उनका भी हौसला बढ़ाया जाना चाहिए। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष खोज के लिए महान प्रयास और त्याग किया है।
चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान लैंडर 'विक्रम' का शुक्रवार देर रात तब संपर्क टूट गया था जब वह सतह से करीब 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। इसे चंद्रमा के लिए देश के दूसरे अभियान का 'सबसे जटिल' प्रक्रिया माना गया था।
मिशन के लिए उम्मीदें तब जगी जब चन्द्रमा के चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम की लोकेशन का पता लगा लिया। ISRO के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि ऑर्बिटर के कैमरे से भेजी गईं तस्वीरों के मुताबिक यह तय जगह के बेहद नजदीक एक 'हार्ड लैंडिंग' थी। लैंडर वहां साबुत है, उसके टुकड़े नहीं हुए हैं। वह झुकी हुई स्थिति में है। ISRO लैंडर से संपर्क के प्रयास कर रहा है।

 

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