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NEET Re-Exam Scam 2026: नागपुर के छात्र का सेंटर आया अबू धाबी, राहुल गांधी का बड़ा बयान

NEET Re-Exam Blunder
NEET Re-Exam Blunder: गलत नीतियों और लापरवाही की वजह से किसी बच्चे का भविष्य दांव पर न लगे! नागपुर के एक छात्र ने परीक्षा से ठीक एक दिन पहले जब अपना NEET एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सेंटर भारत में नहीं, बल्कि सीधे 'अबू धाबी' निकला! न पास में पासपोर्ट, न परिवार के पास अचानक विदेश भेजने के पैसे। जानिए इस गंभीर लापरवाही पर क्यों भड़क उठा है पूरा देश?
 
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET' एक बार फिर विवादों के घेरे में है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जा रही NEET Re-Exam को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था और उसकी जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नागपुर के एक छात्र का परीक्षा केंद्र (Exam Center) अबू धाबी (UAE) अलॉट कर दिया गया, जिसके बाद पीड़ित छात्र और उसका परिवार गहरे मानसिक तनाव में है। ALSO READ: NEET Re-Exam कल: टेलीग्राम बंद, गाड़ियों में GPS और पैरामिलिट्री का पहरा; परीक्षा से पहले जान लें नए नियम

यह शिक्षा व्यवस्था नहीं, मानसिक शांति की वसूली है — राहुल गांधी का तीखा हमला

इस बेहद गंभीर लापरवाही को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर केंद्र सरकार और NTA को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने छात्र के दर्द को बयां करते हुए लिखा: "नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था। शुक्रवार को परीक्षा से ठीक पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी। न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
 
राहुल गांधी ने आगे कहा कि जो सिस्टम एक बच्चे को अपने ही शहर या देश में एक सेंटर नहीं दे सकता, बल्कि उसे बिना वजह विदेश भेज देती है, उसे परीक्षा करवाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने इसे एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की "वसूली" करार दिया है। ALSO READ: राहुल गांधी के साथ कोटा में खड़ा हुआ Gen-Z, NEET पेपर लीक और देश के एजुकेशन सिस्‍टम का किया पोस्‍टमार्टम

आखिर कैसे हुई इतनी बड़ी तकनीकी लापरवाही?

एजुकेशन एक्सपर्ट्स और तकनीकी विशेषज्ञों (Expertise) के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में एडमिट कार्ड जारी करते समय इस तरह की गड़बड़ी दो मुख्य वजहों से हो सकती है:
  • एल्गोरिदम और डेटा मैपिंग एरर : NTA के सर्वर या सॉफ्टवेयर मैपिंग में तकनीकी खामी (Bug) के कारण नागपुर (Nagpur) के पिनकोड या सिटी कोड को सिस्टम ने गलती से अंतरराष्ट्रीय केंद्रों की सूची से मैच कर दिया।
  • चॉइस लॉकिंग में गड़बड़ी : कई बार फॉर्म फिलिंग के दौरान ड्रॉपडाउन मेन्यू में तकनीकी खराबी के चलते यूज़र्स के विकल्पों में हेरफेर हो जाता है, जिसे एडमिट कार्ड जनरेशन के समय क्रॉस-वेरिफाई नहीं किया गया।
  • विशेषज्ञों का मत : परीक्षा से ठीक 24 घंटे पहले एडमिट कार्ड जारी करना और उसमें इतनी बड़ी त्रुटि होना यह दर्शाता है कि NTA का ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम (शिकायत निवारण तंत्र) पूरी तरह से सुस्त है। ऐसे मामलों में छात्र के पास अपनी बात रखने या सेंटर बदलवाने का कोई समय नहीं बचता।

छात्रों और अभिभावकों का फूटा गुस्सा : 'मानसिक प्रताड़ना' का आरोप

सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने के बाद देश भर के नीट उम्मीदवारों और उनके माता-पिता का गुस्सा उबल पड़ा है। कोटा में पढ़ रहे छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेला जा रहा है। एक तरफ जहां छात्र पहले से ही री-एग्जाम के दबाव में महीनों से दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही उनकी बची-कुची मानसिक शांति को भी छीन रही है।

जवाबदेही और सुधार की सख्त जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों में तुरंत और बड़े सुधारों की आवश्यकता है। छात्रों को एक संवेदनशील, जिम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए। मामला बढ़ते ही NTA ने पीड़ित छात्र के लिए नागपुर सेंटर अलॉट करते हुए भूल सुधार करने की बात कही। 
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