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पेपर लीक और घोटालों के बीच बड़ा खुलासा: जयशंकर से लेकर निर्मला सीतारमण तक... केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेश में क्यों पढ़ रहे? भड़के लोग!

Paper Leak in India
NEET Paper Leak: देश में इस वक्त नौकरियों की कमी, प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी, NEET पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। छात्र सड़कों पर हैं और अपनी ढहती शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने इस जलते हुए विवाद में घी का काम किया है।

एक हालिया मीडिया विश्लेषण में यह खुलासा हुआ है कि जहां देश का आम छात्र एक अदद परीक्षा के समय पर होने और उसका रिजल्ट आने का इंतजार कर रहा है, वहीं देश की नीतियां बनाने वाले केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेशों के टॉप विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।

इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है: क्या हमारे नेताओं को खुद भारत की शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है?

आंकड़े जो चौंकाते हैं : कैबिनेट मंत्रियों के 15 बच्चे विदेश में!

एक मीडिया रिपोर्ट के सार्वजनिक आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, मोदी सरकार के कार्यकाल (2014 के बाद) में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले मंत्रियों के 21 बच्चों (आयु वर्ग 18 से 35 वर्ष) में से 15 बच्चों ने विदेशी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल की है या वर्तमान में वहां पढ़ रहे हैं। केवल एक बच्चे ने भारत में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, जबकि बाकी के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।

आइए देखते हैं इस लिस्ट में देश के कौन-से रसूखदार मंत्रियों के परिवारों के नाम शामिल हैं:
Paper Leak in India


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यालय की सफाई : इस विवाद के बीच शिक्षा मंत्री के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी नैमिषा पहले भारत की ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एलएलबी की छात्रा थीं। बाद में उन्हें एक एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक वर्ष के लिए अमेरिका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी से एलएलएम करने का मौका मिला।

"पैसा है तो विदेश चले गए,  हमारा क्या?" - शिक्षा कार्यकर्ताओं का तीखा हमला

इस मुद्दे पर शिक्षा कार्यकर्ताओं और आम जनता ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। कर्नाटक के प्रसिद्ध शिक्षा कार्यकर्ता निरंजनाराध्य वीपी का कहना है:

"यह सिर्फ पर्सनल चॉइस (व्यक्तिगत पसंद) का मामला नहीं है। यह देश की शिक्षा प्रणाली पर भरोसे का सवाल है। जिन नेताओं के पास पैसा और संसाधन हैं, वे अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए विदेश भेज देते हैं। लेकिन उन करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय भारतीय छात्रों का क्या, जो इसी सिस्टम में पिसने को मजबूर हैं?"

वहीं बिहार के शिक्षा कार्यकर्ता अनिल कुमार राय का मानना है कि लगातार होने वाले पेपर लीक, भर्ती घोटालों और रोजगार की अनिश्चितता ने छात्रों का मनोबल तोड़ दिया है। जब देश की पूरी परीक्षा प्रणाली ही संदिग्ध नजर आने लगे, तो सक्षम परिवार अपने बच्चों को दलदल से निकालने के लिए विदेश का रुख करने लगते हैं।

विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में भारी उछाल

आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि भारत के युवा अब देश से बाहर जाने को मजबूर हैं:
Paper Leak in India

सबसे बड़ा सवाल : क्या खोखले हैं 'विश्वगुरु' बनाने के दावे?

यह बहस इस बात पर नहीं है कि किसी को विदेश में पढ़ने का अधिकार है या नहीं। लोकतांत्रिक देश में हर किसी को अपनी मर्जी से पढ़ने की आजादी है। लेकिन सवाल यह है कि जो नीति-निर्माता मंचों से भारत की शिक्षा व्यवस्था को 'विश्वस्तरीय' और देश को 'विश्वगुरु' बनाने के दावे करते हैं, वे खुद अपने बच्चों के लिए भारतीय संस्थानों को सुरक्षित या योग्य क्यों नहीं मानते?

जब तक देश के सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की हालत नहीं सुधरेगी, पेपर लीक जैसे माफियाओं पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक भारत का टैलेंट ऐसे ही विदेशों में पलायन करता रहेगा।
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