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इंदौर में आर्थिक तंगी से मां-बेटे ने खाया जहर, क्‍या देश में बढ़ रहे तंगी से मौत के मामले?

suicide indore
देश में आर्थिक तंगी, कर्ज के बोझ और बेरोजगारी के चलते आत्महत्या या असमय मौत की खबरें समय-समय पर मीडिया में आती रहती हैं। हाल ही में गुजरात के राजकोट शहर में आर्थिक तंगी और कर्जदारों के दबाव के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है।

इंदौर से भी ऐसी ही खबर आई है। इंदौर के परदेशीपुरा में आर्थिक तंगी और मानसिक बीमारी से जूझ रहे मां-बेटे ने जहर खाकर जान दे दी। दोनों ने मंगलवार दोपहर घर से करीब 100 मीटर दूर एक बगीचे में जहरीला पदार्थ खा लिया था। इलाज के दौरान बुधवार शाम बेटे और गुरुवार सुबह मां की मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक 62 वर्षीय इंदिरा पति खुशीराम और उनके 35 वर्षीय बेटे संजय की जहरीला पदार्थ खाने से उपचार के दौरान मौत हुई है। परिजनों ने बताया कि मंगलवार दोपहर दोनों घर के पास स्थित एक बगीचे में पहुंचे और वहां जहर खा लिया। बेहोशी की हालत में मिलने के बाद उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बहन उठा रही थी खर्च : रिश्तेदार शिवम ने बताया कि इंदिरा के पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। इसके बाद वह अपनी बहन, भांजे शिवम और परिवार के साथ रह रही थीं। उनके पालन-पोषण का पूरा खर्च बहन का परिवार ही उठाता था। वहीं बेटा संजय भी कोई काम नहीं करता था। मंगलवार दोपहर किसी परिचित ने शिवम को सूचना दी कि इंदिरा और संजय घर से कुछ दूरी पर स्थित बगीचे में बेसुध पड़े हैं। मौके पर पहुंचने पर दोनों की सांसें चल रही थीं। इसके बाद आसपास के लोगों की मदद से उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

पुलिस को दिए बयान में मां-बेटे ने अपनी मर्जी से जहर खाने की बात कही थी। परिजनों के अनुसार दोनों मानसिक बीमारी से भी पीड़ित थे और उनका इलाज बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था। मामले की जांच परदेशीपुरा पुलिस कर रही है।

क्‍या कहते हैं तंगी से मौतों के आंकड़े :  देश में आर्थिक तंगी, कर्ज (Bankruptcy/Indebtedness) और बेरोजगारी के कारण होने वाली मौतों या आत्महत्याओं के संबंध में आधिकारिक आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट 'Accidental Deaths and Suicides in India' से मिलते हैं।

एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े: कर्ज और गरीबी से मौतें एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, देश में दिवालियापन, कर्ज के बोझ (Bankruptcy or Indebtedness) और गरीबी के कारण हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं।

वर्ष 2023 के आंकड़े: हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में कर्ज, गरीबी और भुखमरी से जुड़े कारणों से कुल 10,903 लोगों ने आत्महत्या की। यह कुल आत्महत्याओं का लगभग 3.8% है।

बेरोजगारी का असर: इसी अवधि में अकेले बेरोजगारी (Unemployment) के कारण जान गंवाने वालों की संख्या भी हजारों में दर्ज की जाती है, जो कुल आत्महत्याओं का करीब 1.8% है।

आय वर्ग का दायरा: एनसीआरबी डेटा बताता है कि आर्थिक तंगी की मार सबसे ज्यादा समाज के निचले टके पर पड़ती है। कुल आत्महत्या करने वालों में से करीब 66% (दो-तिहाई) लोग वे थे जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपए से भी कम थी। इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय असुरक्षा और गरीबी इन चरम कदमों के पीछे सबसे बड़े उत्प्रेरकों में से एक है।

हालिया चर्चित मामले और प्रवृत्तियांपारिवारिक सामूहिक खुदकुशी: देश के विभिन्न हिस्सों (जैसे हाल ही में राजकोट या अन्य जगहों पर) से ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां पूरा परिवार—पति, पत्नी और बच्चे—व्यापार में भारी घाटे, अनौपचारिक साहूकारों (Loan Sharks) के ऊंचे ब्याज और मानसिक दबाव के चलते एक साथ मौत को गले लगा लेते हैं।

दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति: आत्महत्या के कुल आंकड़ों में सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग एक चौथाई) दैनिक वेतन भोगियों (Daily Wage Earners) या छोटे कारीगरों का होता है, जो रोज कमाने-खाने वाले वर्ग से आते हैं और जरा सी आर्थिक मंदी या काम छूटने पर भयंकर तंगी का शिकार हो जाते हैं। 
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