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5 चक्रव्यूह में फंसा मानसून, बारिश को तरसते 7 राज्यों में पारा 40°C के पार, जानें आपके शहर का हाल
Weather Update: क्या आपके शहर में भी मानसून आकर अचानक गायब हो गया है? 15 दिनों में 19 राज्यों को कवर करने वाला मानसून आखिर 8 जून से तेलंगाना में क्यों अटका हुआ है? जानिए आसमान में बने उन 5 'विलेन' सिस्टम के बारे में जिन्होंने रोक रखी है आपकी बारिश!
देशभर में जहां एक तरफ जून की शुरुआत में मानसून की रफ्तार ने उम्मीदें जगाई थीं, वहीं पिछले 11 दिनों से मानसून में आई सुस्ती ने कई राज्यों को झुलसने पर मजबूर कर दिया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत देश के 7 बड़े राज्य इस समय बूंद-बूंद बारिश के लिए तरस रहे हैं। हालत यह है कि इन राज्यों के कई शहरों में पारा 40°C के पार पहुंच चुका है और सामान्य से 60% तक कम बारिश दर्ज की गई है। ALSO READ: मानसून की रफ्तार पर ब्रेक! 15 जून तक 64% कम बारिश, MP-गुजरात समेत कई राज्यों में बढ़ी बेचैनी
बांदा में पारा 43.2°C पार : देश के इन शहरों में भीषण गर्मी का प्रकोप
मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को देश में सबसे ज्यादा तापमान उत्तर प्रदेश के बांदा में 43.2°C रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों में भी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है:
- ओडिशा (बौध) : 42.8°C
- महाराष्ट्र (ब्रह्मपुरी) : 42.3°C
- झारखंड (डाल्टनगंज) : 42°C
- छत्तीसगढ़ (बिलासपुर) : 41.6°C
- बिहार (छपरा) : 41.6°C
- मध्य प्रदेश (खजुराहो) : 41.4°C
क्यों अटका है मानसून? ये हैं वो 5 सिस्टम जिन्होंने बढ़ाई चिंता (Scientific Analysis)
मौसम वैज्ञानिकों (Expertise) के अनुसार, मानसून पिछले 11 दिनों से तेलंगाना में अटका हुआ है और आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसकी मुख्य वजह एक ही समय पर 5 अलग-अलग मौसमी प्रणालियों (Systems) का एक्टिव होना है, जो मानसून को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं:
- अरब सागर से नमी का न आना : इस समय अरब सागर से उठने वाली तेज नमी वाली हवाएं मैदानी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
- बादलों का ठप होना : दक्षिण भारत से मानसून के बादलों का उत्तर की ओर बढ़ने का सिलसिला पूरी तरह से रुक गया है।
- कमजोर ट्रेड विंड्स (व्यापारिक पवनें) : मानसूनी हवाओं को धक्का देने वाली हवाएं इस समय कमजोर पड़ चुकी हैं।
- एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन : मध्य भारत के ऊपर बने एक विपरीत चक्रवातीय सिस्टम के कारण हवाएं नीचे बैठ रही हैं, जिससे बादल नहीं बन पा रहे हैं।
- स्थानीय हीट लो (Heat Low) का कमजोर होना : उत्तर भारत में मानसून को खींचने के लिए जिस मजबूत 'लो प्रेशर एरिया' की जरूरत होती है, वह सही तरीके से डेवलप नहीं हो पाया है। ALSO READ: मानसून पर 'अल नीनो' का साया! भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बड़ी हलचल, IMD ने दी चेतावनी
1 से 18 जून के आंकड़े : महाराष्ट्र और गुजरात में सूखे जैसे हालात
मौसम विभाग के आधिकारिक डेटा (Authoritativeness) के मुताबिक, 1 से 18 जून के बीच पूरे देश में सामान्य से 38% कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार सबसे खराब स्थिति पश्चिमी भारत की रही है:
- गुजरात : यहां सामान्य से सबसे ज्यादा 79% कम वर्षा दर्ज की गई है।
- महाराष्ट्र : इस राज्य में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां सामान्य से 78% कम बारिश हुई है।
किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह
खरीफ की फसलों और धान की नर्सरी तैयार कर रहे किसानों के लिए पूसा कृषि विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं:
- सिंचाई का प्रबंधन : जिन किसानों ने धान की नर्सरी डाल दी है, वे केवल शाम के समय ही हल्की सिंचाई करें ताकि तेज धूप के कारण पानी उबलकर पौधों को नष्ट न करे।
- बुआई में जल्दबाजी न करें : जब तक आपके क्षेत्र में कम से कम 50 से 60 mm बारिश न हो जाए, तब तक मुख्य खेतों में धान की रोपाई या अन्य फसलों की सीधी बुआई करने से बचें।
- नमी संरक्षण : खेतों में जैविक मल्चिंग (जैसे पुआल या सूखी घास) का उपयोग करें ताकि मिट्टी की बची-खुची नमी धूप के कारण जल्दी न उड़े।
कब आगे बढ़ेगा मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 3 से 4 दिनों में बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवातीय सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे तेलंगाना में अटका मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा। उम्मीद है कि 22 जून के बाद मध्य प्रदेश, यूपी और बिहार के लोगों को राहत देने वाली बौछारें देखने को मिल सकती हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
