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Last Updated : बुधवार, 4 फ़रवरी 2026 (14:08 IST)

CM ममता बनर्जी बनीं वकील! बंगाल वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में पेश कीं दलीलें, जानें क्या है पूरा मामला

Mamata Banerjee Lawyer
Mamata Banerjee Lawyer: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक नया इतिहास रच दिया है। वह एक वकील के तौर पर देश की शीर्ष अदालत Supreme Court पहुंची हैं। यह संभवतः पहला मौका है जब कोई पद पर बैठा मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट में खुद दलीलें पेश करने के लिए वकील की पोशाक में नजर आया। ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश करते हुए कहा कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2 साल की प्रक्रिया 3 महीने में कैसे पूरी होगी। अब इस मामले की सुनवाई अगले सोमवार को होगी। 

 

क्या है पूरा विवाद?

पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा राज्य में चलाए जा रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती दी है। ममता बनर्जी का आरोप है कि यह प्रक्रिया असंवैधानिक, जल्दबाजी में भरी और अपारदर्शी है। ममता का सवाल है कि SIR की प्रक्रिया केवल विपक्ष शासित राज्यों में ही क्यों हो रही है? उन्होंने असम (बीजेपी शासित) का उदाहरण देते हुए पक्षपात का आरोप लगाया। याचिका में कहा गया है कि जिन वोटर्स के नाम 'Logical Discrepancy' (तार्किक विसंगति) की श्रेणी में डाले गए हैं, उनकी सूची ऑनलाइन सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

सुनवाई का अधिकार

मुख्यमंत्री की दलील है कि यदि किसी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से काटा जा रहा है, तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। 28 जनवरी को बंगाल सरकार ने इसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। ममता बनर्जी के नाम का गेट पास मंगलवार को ही बन गया था।

बेंच और अन्य याचिकाकर्ता

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच कर रही है। ममता बनर्जी के साथ-साथ टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन ने भी इस संबंध में याचिकाएं दायर की हैं। 

चुनाव आयोग से तकरार

इससे पहले ममता बनर्जी की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बैठक भी काफी चर्चा में रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में तीखी बहस हुई थी और ममता बनर्जी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि वह बंगाल से एक लाख लोगों को दिल्ली ला सकती हैं। ममता का आरोप है कि एसआईआर के दौरान करीब एक करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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