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  4. Mahashivratri in the holy presence of Gurudev Sri Sri Ravi Shankar at the Art of Living International Center
Written By WD Feature Desk
Last Updated : सोमवार, 16 फ़रवरी 2026 (17:16 IST)

आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की पावन उपस्थिति में महाशिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सागर

आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें वर्ष की ऐतिहासिक शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्राचीन अवशेषों के दुर्लभ दर्शन हुए
बेंगलुरु। कल्पना करें, एक ही आकाश के नीचे, एक ही चेतना में डूबे दस लाख से अधिक श्रद्धालु; चारों ओर गहन निस्तब्धता, और उस मौन के मध्य विश्वविख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की दिव्य आभा में सम्पन्न होती एक अत्यंत प्रभावशाली ध्यान-साधना। पावन महाशिवरात्रि की इस रात्रि में यह दृश्य मानो अलौकिक अनुभूति का साक्षात रूप बन गया।
 
आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित इस भव्य महोत्सव के समापन के साथ ही श्रद्धालु अपने साथ एक अविस्मरणीय, आत्मानुभूति से परिपूर्ण संध्या की स्मृतियां लेकर लौटे; जहां आत्मा को स्पंदित कर देने वाला संगीत, गुरुदेव के सान्निध्य में रूपांतरकारी ध्यान-सत्र तथा वैदिक अनुष्ठानों की मंगलध्वनियां वातावरण को पवित्रता, आनंद और उत्सवमयी चेतना से भर रही थीं।
 
इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा, 'महाशिवरात्रि वह अवसर है जब आत्मा भौतिक जगत से ऊपर उठकर किसी सूक्ष्म, दिव्य लोक का स्पर्श करती है। शिव प्रत्येक कण में विद्यमान हैं। हमारी चेतना का स्वभाव ही शिव है। शिव में निमग्न होना भक्ति है, और प्रत्येक में शिव को देखना सेवा है। जो अविनाशी है, वह हमारे भीतर ही है। यदि हमें इतना भी विश्वास हो जाए, तो जीवन में किसी अभाव का स्थान नहीं रहता। कहा जाता है कि जो प्रेम और श्रद्धा से शिवरात्रि का अनुष्ठान करता है, उसकी सभी कामनाएं स्वयं ही पूर्ण हो जाती हैं।' महाकाल की अभिव्यक्ति पर उन्होंने कहा, 'वह योगियों के हृदय में ज्योति बनकर प्रकाशित होते हैं।'
 
संध्या का केन्द्रीय आकर्षण, शिव के कल्याणकारी स्वरूप भगवान रुद्र, को समर्पित एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान, पावन रुद्र पूजा था। श्री रुद्रम के प्राचीन वैदिक मंत्रों पर आधारित यह पूजा शिव की रूपांतरणकारी ऊर्जा का आह्वान करती है, जो नकारात्मकता के क्षय और उच्चतर चेतना के जागरण का प्रतीक है। मान्यता है कि यह अनुष्ठान वातावरण को शुद्ध करके सामूहिक चेतना को उन्नत करता है तथा समाज में शांति, समृद्धि और मंगल का संचार करता है। यह रुद्र पूजा भारत सहित कनाडा, दुबई, जर्मनी और विश्व के 150 से अधिक अन्य स्थलों पर भी एक साथ संपन्न हुई।
 
आश्रम में इस वर्ष का उत्सव विशेष रूप से ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि श्रद्धालुओं को हाल ही में प्राप्त मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्राचीन अवशेषों के दुर्लभ दर्शन का सौभाग्य मिला। माना जाता है कि 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के आक्रमण में यह ज्योतिर्लिंग ध्वस्त कर दिया गया था।
 
रुद्रम के मंत्रोच्चार, वैदिक विधानों और भक्तिमय संगीत की स्वर-लहरियों के मध्य ब्राज़ील, अर्जेंटीना, वेनेज़ुएला, मलेशिया, थाईलैंड, बुल्गारिया, अरब देशों, चीन तथा यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के अनेक राष्ट्रों से आए श्रद्धालु एक ही चेतना में बंधकर नृत्य, गान और ध्यान में लीन हो उठे।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर
नीदरलैंड्स से पहली बार आश्रम आई 80 वर्षीय आर्ट ऑफ लिविंग शिक्षिका अंकेई ने कहा, 'यहां का वातावरण अत्यंत आनंदमय है। लोग अत्यंत सौम्य, सुंदर और सहृदय हैं। जब मैंने गुरुदेव को पूजा के लिए आते देखा, तो मेरी आंखें अश्रुपूर्ण हो गईं। वह क्षण मेरे लिए अत्यंत पूर्णता और हर्ष से भरा था।'
 
रूस से आई ओल्गा, जो पिछले 20 वर्षों से आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी हैं, ने कहा, 'यहां आना घर लौटने जैसा है। मैं यहां से ऊर्जा और शांति लेकर जा रही हूं और अपने देश में भी यही आनंद बाटूंगी।'
 
डच नागरिक इसाबेल ने साझा किया, 'मुझे यहां सब कुछ अद्भुत लग रहा है। वातावरण भक्ति और ऊर्जा से स्पंदित है—वनस्पतियां, पशु-पक्षी, संगीत और गुरुदेव की उपस्थिति—सब मिलकर एक अलौकिक अनुभूति रचते हैं।'
 
दिन भर में तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं को महाप्रसाद परोसा गया, जिसकी तैयारी के लिए 15 टन से अधिक सब्ज़ियों का उपयोग हुआ और हजारों स्वयंसेवकों ने सेवा-भाव से योगदान दिया। आश्रम में इस पावन अवसर पर वैदिक रीति से अनेक विवाह संस्कार भी गुरुदेव की उपस्थिति में सम्पन्न हुए।
 
प्रत्यक्ष आयोजन के अतिरिक्त, एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में लाखों लोगों ने विभिन्न देशों से ऑनलाइन प्रसारण के माध्यम से इस दिव्य उत्सव में सहभागिता की, और महाशिवरात्रि की इस अलौकिक रात्रि को वैश्विक चेतना के उत्सव में बदल दिया।

Edited BY: Raajshri Kasliwal
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