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आसमान के 'सिकंदर' तेजस की राह में रोड़ा, अमेरिका के धोखे से भड़का रक्षा मंत्रालय, HAL पर लगेगा भारी जुर्माना!

बिना इंजन फैक्ट्री में खड़े हैं भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान, 45,696 करोड़ में अमेरिकी कंपनी GE से हुई थी बड़ी डील

LCA Tejas Mk1A delivery delay
LCA Tejas Mk1A delivery delay: भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत में चार चांद लगाने वाले स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिस 'तेजस Mk1A' फाइटर जेट को आसमान में चीन और पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम करना था, वह खुद एक बड़े भंवर में फंस गया है। तय समय सीमा बीतने के दो साल बाद भी वायुसेना को एक भी तेजस विमान डिलीवर नहीं हो पाया है।
 
इस देरी से भड़का रक्षा मंत्रालय अब अपनी ही सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर भारी-भरकम जुर्माना (Penalty) लगाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा और खतरनाक विलेन कोई और नहीं, बल्कि सुपरपावर अमेरिका है, जिसने ऐन वक्त पर भारत को तगड़ा झटका दे दिया है।

45,696 करोड़ की महाडील, और.... 

भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने साल 2021 में HAL के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया था। इसके तहत 45,696 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से 83 LCA तेजस Mk1A विमान बनाए जाने थे। इस फ्लीट में 73 लड़ाकू विमान और 10 ट्रेनर विमान शामिल हैं।
 
समझौते की शर्तों के मुताबिक, HAL को फरवरी 2024 से इन विमानों की सप्लाई शुरू करनी थी और हर साल कम से कम 8 विमान वायुसेना को सौंपने थे। लेकिन हकीकत यह है कि आज दो साल बीत जाने के बाद भी भारतीय वायुसेना का एक भी नया स्क्वाड्रन तैयार नहीं हो पाया है, क्योंकि वायुसेना की झोली में एक भी विमान नहीं आया है।

आखिर कहां फंसा है मामला?

जब इस देरी की परतें खोली गईं, तो इसके पीछे अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की एक बड़ी लापरवाही सामने आई। तेजस Mk1A को उड़ाने के लिए जिस 'दिल' यानी F404-IN20 इंजन की जरूरत है, उसे सप्लाई करने का जिम्मा अमेरिकी कंपनी का था। दरअसल, भारत ने साल 2021 में अमेरिका के साथ 99 इंजनों की खरीद का करार किया था।

सप्लाई की रफ्तार बेहद सुस्त

इन इंजनों की डिलीवरी अप्रैल 2023 से शुरू होनी थी, लेकिन अमेरिकी सुस्ती का आलम यह है कि अप्रैल 2026 तक भारत को 99 में से सिर्फ 6 इंजन ही मिल पाए हैं। यह मुद्दा इतना गंभीर हो चुका है कि खुद भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई बार अमेरिकी रक्षा मंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन इसके बावजूद वॉशिंगटन से इंजनों की सप्लाई ठप पड़ी है।

विमान तैयार, पर उड़ने के लिए पर नहीं!

HAL की फैक्ट्री से जो तस्वीरें और रिपोर्ट सामने आ रही हैं, वे किसी भी हिंदुस्तानी का दिल दुखा सकती हैं। भारत के जांबाज फाइटर जेट बिना इंजन के कारखाने में खड़े धूल खा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 20 तेजस विमानों के ढांचे (Airframes) पूरी तरह तैयार खड़े हैं, लेकिन इंजन न होने के कारण वे उड़ नहीं सकते। दूसरी ओर, HAL का दावा है कि 5 विमान पूरी तरह तैयार हैं और 9 अन्य की टेस्टिंग चल रही है, लेकिन इनमें भी सिर्फ 'स्थाई टेस्टिंग इंजन' लगाए गए हैं। जब तक अमेरिका से नए इंजन नहीं आते, इन्हें औपचारिक रूप से वायुसेना को नहीं सौंपा जा सकता।

वायुसेना की सुरक्षा योजनाओं पर मंडराया संकट!

तेजस विमानों की डिलीवरी में हो रही इस सनसनीखेज देरी ने भारतीय वायुसेना के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वायुसेना अपने पुराने हो रहे लड़ाकू विमानों (जैसे मिग-21) को रिटायर करके तेजस की नई स्क्वाड्रन बनाने की तैयारी में थी। अब स्थिति यह है कि न तो रक्षा मंत्रालय और न ही वायुसेना के आला अधिकारी यह बता पा रहे हैं कि भारत के इन रक्षकों को आखिर उनके 'पर' कब मिलेंगे। दुश्मनों के खिलाफ आसमान में देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाए रखने की योजना फिलहाल फाइलों और वादों के जाल में फंसकर रह गई है।

तेजस की कुछ खास खूबियां

तेजस में यूं तो कई खूबियां हैं, लेकिन यहां कुछ की ही चर्चा कर रहे हैं। यह विमान आसमान में दुश्मन से मुकाबला करने (Air-to-Air combat), जमीन पर हमला करने (Air-to-Surface) और टोही (Reconnaissance) मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है। तेजस में पूंछ नहीं होती (Tail-less) और इसके पंख त्रिकोणीय आकार के हैं। यह डिजाइन इसे बहुत कम जगह में तेजी से मुड़ने और हवा में बेहतरीन कलाबाजियां दिखाने की ताकत देता है। इसके ढांचे में कार्बन कंपोजिट मैटेरियल का बड़े पैमाने पर (लगभग 45%) इस्तेमाल किया गया है। इसके कारण विमान का वजन बहुत कम है, यह रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता और इसमें जंग लगने का खतरा नहीं होता।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala  
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