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क्या जीतू पटवारी साबित होंगे कांग्रेस के सबसे कमजोर अध्यक्ष, मोहन यादव की बात हो रही सच?
मध्यप्रदेश में कांग्रेस सिर्फ चुनाव ही नहीं, बल्कि चुनाव लड़ने की बुनियादी समझ भी हारती जा रही है। मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन खारिज होने से लेकर कांग्रेस से पूर्व नेता अक्षय बम, मुकेश मल्होत्रा और दतिया से नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज को हराने वाले विधायक राजेंद्र भारती भी अघोषित हो चुके हैं। ताजा मामला मीनाक्षी नटराजन का है।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की विफलता की कहानी सुनाती ये घटनाएं अब महज 'तकनीकी चूक' नहीं लगतीं। यह मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सांगठनिक नेतृत्व और राजनीतिक सूझबूझ पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने का ठिकरा बीजेपी के सिर पर फोड़ा जा रहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और सदस्य ही जीतू पटवारी पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ खुलकर सामने आए हैं तो कुछ ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर मध्यप्रदेश में कांग्रेस को गर्त में ले जाने वाली कहानी बताई है, इस विफलता की पूरी स्क्रिप्ट के पीछे कोई ओर नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखे और आक्रामक हमले किए थे। सुजालपुर में एक जनसभा के दौरान सीएम मोहन यादव ने पटवारी को 'दो कौड़ी का प्रदेश अध्यक्ष' और 'रद्दी अध्यक्ष' तक कह दिया था। सीएम यादव के इस बयान को खुद कांग्रेस में समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस के लोग पटवारी को 'रद्दी अध्यक्ष' बता रहे हैं।
पटवारी पार्टी नहीं चला सकते : मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष अजय चौरड़िया ने वेबदुनिया बताया कि यह लिखकर रख लो कि मप्र कांग्रेस को जीतू पटवारी नहीं चला सकते। माननीय दिग्विजय सिंह और कमलनाथजी के मार्गदर्शन और नेतृत्व के बगैर पार्टी नहीं चल सकती। यही सच बोलने के लिए मुझे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जा चुका है। लेकिन मैं सच बोलूंगा।
कांग्रेस मध्यप्रदेश के पूर्व महासचिव राकेश सिंह ने वेबदुनिया को बताया कि यह सारे मामले राहुल गांधी को संज्ञान में लेना चाहिए, नैतिकता के आधार पर इसकी जांच होना चाहिए, क्योंकि इन घटनाओं के आधार पर मध्यप्रदेश कांग्रेस में कई आशंकाएं जन्म ले रही हैं। मध्यप्रदेश में नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है, इस बारे में राहुल जी को संज्ञान लेना चाहिए।
क्रॉस वोटिंग से थू-थू हो जाती इसलिए प्लान था : इंदौर के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस के गर्त में जाने की पूरी स्क्रिप्ट बताई है। उन्होंने बताया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना जीतू पटवारी के प्लान का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि क्रॉस वोटिंग हो जाती तो पटवारी की थू- थू हो जाती, बस इसी वजह से नामांकन लीक करवा दिया और वो रद्द हो गया।
रील बनाकर इमेज चमका रहे पटवारी : कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पटवारी फेसबुक पर रील बनाकर खुद की इमेज चमका रहे हैं। उन्हें पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। वे कह भी चुके हैं कि पार्टी गई तेल लेने, उनके स्वभाव में आज भी वही बात है। प्रदेश में कांग्रेस खत्म हो रही है। यही हालात रहे तो मप्र में कांग्रेस के 20 विधायकों का जीतना भी मुश्किल हो जएगा। कांग्रेस नेताओं का तो यहां तक कहना है कि इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, देवास, शाजापुर आदि मिलाकर 8 जिलों में एक भी विधायक के जीतने की गारंटी जीतू पटवारी दे दें तो हम समझेंगे कि उन्होंने पार्टी के लिए कोई काम किया है।
विधायकों से तू तुकारे से बात करते हैं : संगठन की बात करें तो पार्टी में नेताओं, विधायकों और पार्षदों तक के साथ जीतू पटवारी के खराब व्यवहार का फीडबैक मिल रहा है। नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधायकों तक से वे तू तूकारे बात करते हैं, पार्षदों से सीधे मुंह बात नहीं करते, गाली गलौच करना आम बात है। कुल मिलाकर उनके व्यवहार को लेकर पार्टी में भारी असंतोष है। लोग उनके तौर तरीकों से खासे नाराज हैं, कई बार आलाकमान को शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका। ऐसे में यह असंतोष पार्टी को ही गर्त में लेकर जा रहा है।
अक्षय बम से लेकर नटराजन तक : एक कांग्रेस नेता ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है, पटवारी के नेतृत्व में इंदौर के पूर्व नेता अक्षय बम, मुकेश मल्होत्रा और दतिया से नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज को हराने वाले विधायक राजेंद्र भारती भी अघोषित हो चुके हैं। यह कोई महज 'तकनीकी चूक' नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के सांगठनिक नेतृत्व और राजनीतिक सूझबूझ पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। मीनाक्षी नटराजन और अक्षय बम दोनों ही मामलों में डमी उम्मीदवार नहीं उतारा गया। यह तो बहुत ही बैसिक बात थी। इसके पीछे क्या वजह है।
दिग्विजय सिंह और कमलनाथ हाशिये पर : कांग्रेस के अंदर से खबर है कि जीतू पटवारी के कार्यकाल में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों अनुभवी और दिग्गज नेता हाशिये पर चले गए हैं। अरुण यादव को घर बैठा दिया गया है। कमलेश्वर पटेल को भी खत्म करने में लगे हैं। सज्जन सिंह वर्मा और अजय सिंह से कोई तालमेल नहीं है।
निर्मला सप्रे एपिसोड : एक कांग्रेस नेता ने बताया कि जीतू पटवारी कांग्रेस नेता निर्मला सप्रे को लेकर अब तक कुछ कर नहीं पाए हैं, सप्रे लगातार और खुलकर कांग्रेस का विरोध कर रही हैं और भाजपा के साथ नजर आ रही हैं, दलबदल कानून के मुताबिक जीतू पटवारी को अब तक उनकी सदस्यता को लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन इसे लेकर भी वे गंभीर नहीं हैं।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की विफलता की कहानी सुनाती ये घटनाएं अब महज 'तकनीकी चूक' नहीं लगतीं। यह मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सांगठनिक नेतृत्व और राजनीतिक सूझबूझ पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने का ठिकरा बीजेपी के सिर पर फोड़ा जा रहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और सदस्य ही जीतू पटवारी पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ खुलकर सामने आए हैं तो कुछ ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर मध्यप्रदेश में कांग्रेस को गर्त में ले जाने वाली कहानी बताई है, इस विफलता की पूरी स्क्रिप्ट के पीछे कोई ओर नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखे और आक्रामक हमले किए थे। सुजालपुर में एक जनसभा के दौरान सीएम मोहन यादव ने पटवारी को 'दो कौड़ी का प्रदेश अध्यक्ष' और 'रद्दी अध्यक्ष' तक कह दिया था। सीएम यादव के इस बयान को खुद कांग्रेस में समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस के लोग पटवारी को 'रद्दी अध्यक्ष' बता रहे हैं।
कांग्रेस मध्यप्रदेश के पूर्व महासचिव राकेश सिंह ने वेबदुनिया को बताया कि यह सारे मामले राहुल गांधी को संज्ञान में लेना चाहिए, नैतिकता के आधार पर इसकी जांच होना चाहिए, क्योंकि इन घटनाओं के आधार पर मध्यप्रदेश कांग्रेस में कई आशंकाएं जन्म ले रही हैं। मध्यप्रदेश में नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है, इस बारे में राहुल जी को संज्ञान लेना चाहिए।
क्रॉस वोटिंग से थू-थू हो जाती इसलिए प्लान था : इंदौर के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस के गर्त में जाने की पूरी स्क्रिप्ट बताई है। उन्होंने बताया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना जीतू पटवारी के प्लान का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि क्रॉस वोटिंग हो जाती तो पटवारी की थू- थू हो जाती, बस इसी वजह से नामांकन लीक करवा दिया और वो रद्द हो गया।
रील बनाकर इमेज चमका रहे पटवारी : कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पटवारी फेसबुक पर रील बनाकर खुद की इमेज चमका रहे हैं। उन्हें पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। वे कह भी चुके हैं कि पार्टी गई तेल लेने, उनके स्वभाव में आज भी वही बात है। प्रदेश में कांग्रेस खत्म हो रही है। यही हालात रहे तो मप्र में कांग्रेस के 20 विधायकों का जीतना भी मुश्किल हो जएगा। कांग्रेस नेताओं का तो यहां तक कहना है कि इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, देवास, शाजापुर आदि मिलाकर 8 जिलों में एक भी विधायक के जीतने की गारंटी जीतू पटवारी दे दें तो हम समझेंगे कि उन्होंने पार्टी के लिए कोई काम किया है।
विधायकों से तू तुकारे से बात करते हैं : संगठन की बात करें तो पार्टी में नेताओं, विधायकों और पार्षदों तक के साथ जीतू पटवारी के खराब व्यवहार का फीडबैक मिल रहा है। नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधायकों तक से वे तू तूकारे बात करते हैं, पार्षदों से सीधे मुंह बात नहीं करते, गाली गलौच करना आम बात है। कुल मिलाकर उनके व्यवहार को लेकर पार्टी में भारी असंतोष है। लोग उनके तौर तरीकों से खासे नाराज हैं, कई बार आलाकमान को शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका। ऐसे में यह असंतोष पार्टी को ही गर्त में लेकर जा रहा है।
दिग्विजय सिंह और कमलनाथ हाशिये पर : कांग्रेस के अंदर से खबर है कि जीतू पटवारी के कार्यकाल में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों अनुभवी और दिग्गज नेता हाशिये पर चले गए हैं। अरुण यादव को घर बैठा दिया गया है। कमलेश्वर पटेल को भी खत्म करने में लगे हैं। सज्जन सिंह वर्मा और अजय सिंह से कोई तालमेल नहीं है।
निर्मला सप्रे एपिसोड : एक कांग्रेस नेता ने बताया कि जीतू पटवारी कांग्रेस नेता निर्मला सप्रे को लेकर अब तक कुछ कर नहीं पाए हैं, सप्रे लगातार और खुलकर कांग्रेस का विरोध कर रही हैं और भाजपा के साथ नजर आ रही हैं, दलबदल कानून के मुताबिक जीतू पटवारी को अब तक उनकी सदस्यता को लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन इसे लेकर भी वे गंभीर नहीं हैं।
