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Last Updated :नई दिल्ली , शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 (23:19 IST)

Shaksgam Valley : शक्सगाम वैली विवाद क्या है, चीन के साथ भारत ने Pakistan को भी लगाई लताड़

Shaksgam Valley
Shaksgam Valley Dispute : भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley)भारत का संप्रभु हिस्सा है। भारत की शक्सगाम वैली में चीन ने अवैध निर्माण के जरिए तनाव को बढ़ा दिया है। चीन ने शक्सगाम से चीन-पाकिस्तान-इकोनॉमिक कोरिडोर को ग्वादर पोर्ट तक जोड़ने का प्रयास किया है। इससे चीन की ही नही, बल्कि पाकिस्तान की भी भारत पर रणनीतिक बढ़त काफी मजबूत हो जाएगी। भारत ने चीन की इस हरकत का कड़ा प्रतिरोध किया है।
विदेश मंत्रालय ने 1963 के चीन-पाकिस्तान 'सीमा समझौते' को अवैध और अमान्य बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। गलवान के बाद चीन अब शक्सगाम को लेकर विवाद कर रहा है। भारत चीन‑पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को भी मान्यता नहीं देता है। 
 
पाकिस्तान ने चीन को तोहफे में दिया
शक्सगाम घाटी गिलगिट-बाल्टिस्तान (Pok) का हिस्सा है। जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था। यानी यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का हिस्सा है। यह क्षेत्र काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में और सियाचिन ग्लेशियर के बिल्कुल करीब स्थित है। पाकिस्तान ने 1963 में एक समझौते के साथ इस घाटी को चीन को दे दिया था। (लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र) को चीन को सौंप दिया था। भारत ने शुरू से ही इस समझौते को खारिज किया है, क्योंकि यह क्षेत्र पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का हिस्सा है। पीओके 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और भारत का अभिन्न अंग है। बावजूद पाकिस्तान ने भारत की इस घाटी को चीन को तोहफे में दे दिया। 
CPEC को भी भारत ने नहीं दी मान्यता 
भारत ने कहा है कि चीन‑पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को भी भारत मान्यता नहीं देता, क्योंकि यह भारत के उस क्षेत्र से होकर गुजरता है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। भारत ने 1963 में हुआ तथाकथित चीन‑पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी यह अवैध और अमान्य है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के पास इस भूमि को चीन को देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
हुंजा वैली को लेकर भी डाला दबाव
एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक चीन हुंजा वैली में पाकिस्तान पर बार-बार दबाव डाल रहा था कि यह घाटी उसको चाहिए, क्योंकि चीन हुंजा में पहले से मौजूद था और वह खुंजराब पास में चारों तरफ से हाईवे लाना चाहता था। चीन यह हाईवे वह बना चुका है, जिसे अब ड्रैगन चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर (CPEC) के जरिए ग्वादर पोर्ट तक ले गया है। इसका चीन के लिए खास रणनीतिक महत्व है। चीन खुंजराब पास से पहले से ही इस क्षेत्र में भारत के काफी करीब आ चुका था। काराकोरम हाईवे भी उनके (चीन के) पास है, जिसे चीन ने पाकिस्तान में बनाया था। 
सड़क बनने से भारत को कितना खतरा
अब भारत की शक्सगाम वैली में सड़क बनने से चीन और पाकिस्तान पहले से और करीब आ जाएंगे। धीरे-धीरे चीन यहां से सियाचिन में अब घुसने की कोशिश करेगा। ऐसे में चीन-पाकिस्तान रणनीतिक रूप से यहां भारत पर बढ़त बना लेंगे।यह भारत के लिए बड़ा खतरा है। चीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शक्सगाम क्षेत्र में एक लंबी 'ऑल-वेदर' (हर मौसम में चालू रहने वाली) सड़क का निर्माण कर रहा है। 
 
कुछ दिन पहले सैटेलाइट तस्वीरों से जो बात सामने आई उसके अनुसार, चीन निचली शक्सगाम घाटी में सड़क का निर्माण कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक लगभग 10 मीटर चौड़ी इस सड़क का 75 किलोमीटर हिस्सा पहले ही बनकर तैयार हो चुका है और निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। यह क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है, जो भारतीय सेना के लिए अत्यधिक सामरिक महत्व रखता है। 
मिलिट्री ऑपरेशन के साथ मीठे पानी पर भी कब्जा
रक्षा एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक शक्सगाम वैली से चीन को भारत को घेरना और आसान हो जाएगा। शक्सगाम वैली की चोटी तक यहां से पहुंचना चीन के लिए अब बहुत आसान हो जाएगा, जहां से वह भारत के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दे सकेगा। इसके साथ ही यहां मिलने वाले मीठे पानी पर भी चीन का पूरा कब्जा हो जाएगा। चीन चाहता है कि भारत को मीठा पानी भी न मिले और उसे रणनीतिक रूप से यहां घेर भी दिया जाए। यदि चीन यहां अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाता है, तो वह सियाचिन में तैनात भारतीय सेना के लिए सीधा खतरा पैदा कर सकता है।  Edited by: Sudhir Sharma
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