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गुजरात में बनेगा देश का नया शिप बिल्डिंग हब: राज्य सरकार ने लॉन्च की नई 'शिप बिल्डिंग एंड रिपेयर पॉलिसी'

shipbuilding hub in gujarat
देश में सबसे लंबा 2,340 किलोमीटर का समुद्री तट (कोस्टलाइन) रखने वाला गुजरात अब अत्याधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के दम पर देश का प्रमुख शिप बिल्डिंग और रिपेयर हब बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा लॉन्च की गई यह नई नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत', भारत सरकार की SBFAS-2025 योजना और मैरीटाइम विजन 2047 के लक्ष्यों के अनुकूल है। इस नीति के तहत शिपयार्ड्स के विकास, ग्रीन और स्मार्ट शिपयार्ड्स, क्षमता निर्माण तथा शिपबिल्डिंग क्षेत्र में R&D और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
 

इंटीग्रेटेड मेगा शिपबिल्डिंग पार्क और पोरबंदर क्लस्टर

इस पॉलिसी का मुख्य आकर्षण इंटीग्रेटेड मेगा शिपबिल्डिंग पार्क (IMSP) का विकास है, जो मरीन इक्विपमेंट क्लस्टर्स, लॉजिस्टिक्स, टेस्टिंग फैसिलिटीज और R&D केंद्रों से लैस एक आधुनिक औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करेगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पोरबंदर के कुछड़ी में मेगा ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर को मंजूरी दी गई है, जहां 2 से 3 विश्वस्तरीय शिपयार्ड स्थापित किए जाएँगे। इस प्रोजेक्ट से लगभग 23,700 करोड़ का भारी निजी निवेश आकर्षित होने की संभावना है।
 

3,300 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी वित्तीय सहायता

इस विशाल मैरीटाइम इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लगभग 3,300 करोड़ रुपए की लागत से मरीन और जमीन आधारित बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार की Shipbuilding Development Scheme (SbDS) तथा गुजरात सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इन सुविधाओं में ब्रेकवाटर्स, ड्रेजिंग, फ्लोटिंग क्रेन, नेविगेशन चैनल, सड़कें, बिजली और पानी की आपूर्ति जैसी संयुक्त सुविधाएं शामिल हैं, जिससे निवेशकों की लागत घटेगी और काम में तेजी आएगी।
 

निवेशकों के लिए प्रोत्साहन और सिंगल विंडो सिस्टम

निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नई नीति के तहत कैपिटल असिस्टेंस (Capital Assistance), ब्याज सहायता, स्टाम्प ड्यूटी रिफंड, ड्रेजिंग सहायता, बिजली और पानी के चार्ज में सब्सिडी तथा MSMEs से खरीदारी पर विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। शुरुआती दौर में काम शुरू करने वाले (Early Bird) निवेशकों के लिए भी विशेष लाभ रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त, त्वरित स्वीकृतियों के लिए 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम' और शिकायत निवारण प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
 

'विकसित गुजरात-2047' की ओर एक बड़ा कदम

इस पॉलिसी के माध्यम से गुजरात अपनी शिपबिल्डिंग क्षमता को 50 लाख DWT (Dead Weight Tonnage) से अधिक तक पहुँचाएगा, दो मेगा शिपबिल्डिंग पार्क्स स्थापित करेगा और 5 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित कर रोजगार के योग्य बनाएगा। गुजरात मैरीटाइम बोर्ड (GMB) द्वारा इस पॉलिसी के दिशानिर्देश भी तैयार कर लिए गए हैं।
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