विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'
Foreign media on CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने न सिर्फ भारत की राजनीति में हलचल मचा दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी खींच लिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के झुकने को लेकर विदेशी अखबारों और चैनलों ने इसे युवाओं की दुर्लभ जीत बताया। पाकिस्तान के Dawn अखबार ने तो सीधे लिख दिया – "कॉकरोच जीत गए", जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को "एक्सीडेंटल हीरो" करार दिया, जिसने मोदी सरकार को झुकने पर मजबूर किया।
CJP आंदोलन की पृष्ठभूमि
CJP की शुरुआत मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के एक टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' की उपमा दी थी (बाद में स्पष्टीकरण दिया गया कि यह फर्जी डिग्री वालों के लिए था)। बोस्टन में रह रहे अभिजीत दीपके ने इसे व्यंग्यात्मक तरीके से लिया और 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया। अनरोजगारी, NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और युवाओं की समस्याओं को उठाते हुए यह आंदोलन जंतर-मंतर पर धरने में बदल गया। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?
36-37 दिनों के आंदोलन, भूख हड़ताल और संसद की ओर मार्च के बाद सरकार को झुकना पड़ा। प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा सुधारों का वादा और प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे वापस लेने जैसे मांगें मान ली गईं।
पाकिस्तानी मीडिया का रिएक्शन
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार Dawn ने इसे युवा प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत बताया। एक रिपोर्ट में लिखा गया कि "भारत के मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि युवा 'कॉकरोच' जीत गए"। Geo TV ने भी AFP रिपोर्ट के हवाले से "Cockroach protests end in victory" शीर्षक से खबर चलाई। पाकिस्तानी मीडिया ने इसे मोदी सरकार के लिए "दुर्लभ पीछे हटना" करार दिया। ALSO READ: हम कॉकरोच हैं, आसानी से नहीं निकलेंगे! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP चीफ दीपके का बयान, 49 दिन चले आंदोलन का अंत
NYT और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अभिजीत दीपके को "एक्सीडेंटल हीरो" कहा, जो संयोग से हीरो बन गया और सरकार को झुकाया। NYT ने इसे मोदी सरकार के लिए "rare retreat" बताया, जहां असहमति की जगह लगातार सिकुड़ रही थी। रिपोर्ट में NEET विवाद से शुरू हुए आंदोलन को युवाओं की बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और अवसरों की कमी पर व्यापक गुस्से से जोड़ा गया।
BBC ने 'कॉकरोच' पहचान के प्रतीकात्मक बदलाव पर फोकस किया – अपमान को प्रतिरोध का बैनर बना लिया गया। Financial Times ने इसे मोदी सरकार की समृद्धि के वादे की परीक्षा बताया और Gen Z की निराशा को हाइलाइट किया। Al Jazeera, NBC, South China Morning Post आदि ने भी पुलिस कार्रवाई, युवा विद्रोह और 'defiant young cockroaches' को कवर किया।
भारतीय मीडिया के अलावा दुनिया भर के मीडिया ने इसे प्रमुखता दी। युवाओं के आंदोलन को छात्र एकता और जवाबदेही की मांग के रूप में देखा गया।

