सम्बंधित जानकारी
- नीट परीक्षार्थियों के लिए बड़ी खबर: 21 जून को होगी री-एग्जाम
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा एलान, अगले साल से ऑनलाइन होगी NEET परीक्षा
- Weather Update : तेजी से बदल रहा मौसम, कई राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट, कब आएगा मानसून?
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग, कांग्रेस ने कहा- 'महंगाई मैन' मोदी ने फिर जनता पर हंटर चलाया
- महंगाई का झटका: दिल्ली में पेट्रोल-डीजल 3 रुपए महंगा, CNG के दाम भी बढ़े; जानें नई दरें
भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धार भोजशाला को माना मंदिर, हिंदुओं को मिला पूजा का अधिकार
Dhar Bhojshala Verdict : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शुक्रवार को बड़ा फैसला देते हुए धार भोजशाला को मंदिर करार दिया। अदालत ने कहा कि यहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार है। फैसला देते समय अदालत ने ऐतिहासिक साक्ष्यों को ध्यान में रखा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है। भोजशाला परिसर में एएसआई का संरक्षण जारी रहेगा। मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है।
क्या कहा एडवोकेट विष्णु जैन ने?
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि भोजशाला मामले में इंदौर हाई कोर्ट की ओर से एक ऐतिहासिक फैसला आया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर के रूप में मान्यता दी है। कोर्ट ने हिंदुओं को वहां पूजा-अर्चना करने का अधिकार भी दिया है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा है कि वे सरकार को एक आवेदन दें। सरकार धार में उन्हें वैकल्पिक ज़मीन देने पर विचार करेगी।
क्या बोले अमित मालवीय?
भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, भोजशाला मामले में अदालत के फैसले ने इस परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दे दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, अधिकारियों ने पूरे धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं।
A court verdict in the Bhojshala case has recognized the complex as the temple of Goddess Vagdevi. Given the sensitivity of the matter, authorities have tightened security across Dhar, with police and administrative officials remaining on high alert to maintain peace and order. https://t.co/tQalteycL9
— Amit Malviya (@amitmalviya) May 15, 2026
धार की भोजशाला को हिन्दू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताया था। हिन्दू पक्ष को उम्मीद थी कि उसे नियमित पूजा की अनुमति मिलेगी। सुनवाई के दौरान हिन्दू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं और स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा।
इस लंबी सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से बहस हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
edited by : Nrapendra Gupta
