कांग्रेस और TMC में डील फाइनल! सोनिया गांधी ने दिए 2 प्रस्ताव, क्या बोलीं ममता बनर्जी
Congress-TMC deal Mamata Banerjee: दिल्ली की सियासी गलियारों में इन दिनों गहमा-गहमी है। 8 जून को इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद से लेकर 10 जून तक चली तेज़ रफ़्तार मुलाकातों ने साफ संकेत दे दिया है कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच एक बड़ी डील लगभग फाइनल हो चुकी है। माना जा रहा है कि टीएमसी का कांग्रेस में विलय हो सकता है।
यदि यह डील फाइनल होती है तो इसमें दोनों ही पक्षों का फायदा होगा। बंगाल में मृतप्राय: कांग्रेस में नई जान आ जाएगी, वहीं राज्य में कमजोर होतीं ममता की पकड़ एक बार फिर मजबूत हो जाएगी। क्योंकि अभी वे अकेले ही मोर्चा लड़ा रही हैं, कांग्रेस का साथ मिलने से उनकी ताकत बढ़ जाएगी और वे भाजपा से मुकाबला कर पाएंगी।
आठ जून को गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी सोनिया गांधी से मिलीं। अगले दिन यानी 9 जून को ममता बनर्जी 10 जनपथ पहुंचीं। और आज 10 जून को TMC महासचिव व ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी राहुल गांधी से डेढ़ घंटे तक मुलाकात करने पहुंचे। मात्र दो दिनों में दिल्ली में दो अहम मुलाकातें— ये कोई सामान्य सियासी औपचारिकता नहीं थीं। ALSO READ: ममता बनर्जी को बड़ा झटका: TMC सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा, CM हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद BJP में जाने के कयास
क्या सोनिया गांधी का प्रस्ताव मानेंगी ममता?
सूत्रों के मुताबिक पहली मुलाकात में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी के सामने दो बड़े प्रस्ताव रखे। यदि वे टीएमसी का कांग्रेस में विल करती हैं तो ममता बनर्जी को कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाएगा और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जाएगा।
ममता बनर्जी ने तुरंत जवाब देने की बजाय कुछ समय मांगा। रात भर मंथन चला। सुबह होते ही अभिषेक बनर्जी राहुल गांधी से मिलने पहुंच गए। डेढ़ घंटे की इस मुलाकात के बाद अभिषेक ने अपने करीबियों से कहा— 'बैठक अच्छी रही'। सियासी भाषा में इसका मतलब साफ है— सब कुछ तय हो चुका है।
लेकिन, अभिषेक बनर्जी ने भी अपना एक प्रस्ताव रखा। वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी को राज्यसभा भेजा जाए और वहां नेता विपक्ष का पद सौंपा जाए। यानी वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास मौजूद पद को ममता के लिए खाली किया जाए। कांग्रेस के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा, लेकिन सुलह की चाहत इतनी मजबूत है कि खरगे खुद रास्ता निकाल सकते हैं। अंतिम फैसला सोनिया गांधी ही लेंगी। ALSO READ: TMC से 20 सांसदों की बगावत पर भड़के कल्याण बनर्जी, बोले- सत्ता के लिए ममता को छोड़ गए
2024 vs 2029 : रोल रिवर्सल
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों की जरूरत थी, लेकिन 2029 में स्थिति उलट हो सकती है। क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस की ज़रूरत पड़ेगी। ममता बनर्जी के साथ हो रहा यह घटनाक्रम बाकी क्षेत्रीय दलों के लिए भी एक बड़ा संदेश है — जो साथ हैं, उनके लिए अवसर और जो अभी भी दूरी बनाए हुए हैं, उनके लिए चेतावनी।
उल्लेखनीय है कि यह वही ममता बनर्जी हैं जिन्होंने 1984 में जादवपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा था और सोमनाथ चटर्जी जैसे दिग्गज को हराकर संसद पहुंची थीं। 1998 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर AITC की नींव रखी और 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं। अब दशकों बाद कांग्रेस के साथ वापसी की अटकलें जोर पकड़ रही हैं — और इस बार शर्तों के साथ।
क्या यह गठबंधन 2029 की तैयारी है? क्या ममता कांग्रेस की राष्ट्रीय पटरी पर लौटेंगी? या यह सिर्फ रणनीतिक समझौता है? सियासी गलियारों में सवालों का सिलसिला जारी है, लेकिन एक बात तय दिख रही है — गेम बदलने वाला समझौता बहुत करीब है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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