PM आवास पर कांग्रेस का धरना, हाईवोल्टेज हंगामा, राहुल, प्रियंका और अखिलेश समेत सभी नेता पुलिस हिरासत से छूटे
Published By: सुधीर शर्मा
Updated: Wed, 22 Jul 2026 (00:07 IST)
परीक्षा पत्र लीक के कथित मामलों, विशेष रूप से नीट (NEET) विवाद, और छात्रों के मुद्दों पर जवाबदेही की मांग को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला और आवास के बाहर धरना दिया।। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया। यहां से करीब 3 घंटे बाद रात 9.45 बजे सभी को रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट वीडियो में कहा कि पीएम मोदी देश के छात्रों माफी मांगे।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। कई घंटे तक हिरासत में रखने के बाद देर शाम उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस ने अखिलेश यादव समेत सभी नेताओं को रिहा कर दिया।
पीएम, शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित 7, लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास) के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि एक दिन पहले Cockroach Janata Party (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए सरकार जिम्मेदार है और उसे इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए।
हाथ-पैर पकड़कर बस में बैठाया
3 घंटे के धरने के दौरान सरकार ने राहुल से 2 बार बातचीत की, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी पहुंचे तो कांग्रेसियों ने घेरा बना लिया और राहुल तक पहुंचने नहीं दिया। पुलिसकर्मी राहुल गांधी को ले जाने पहुंचे तो वह जमीन पर लेट गए। कांग्रेसियों और पुलिस के बीच आधे घंटे तक धक्का-मुक्की होती रही। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। काफी मनाने पर भी जब राहुल गांधी नहीं उठे तो 12 से ज्यादा पुलिसकर्मी उनके हाथ-पैर पकड़कर उठाकर ले गए और बस में बैठाया।
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री आवास तक इसलिए मार्च कर रही है ताकि छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस ज्यादती को लेकर सरकार से जवाब मांगा जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस घटना की जिम्मेदारी लेने से बच रही है और संसद में इस मुद्दे पर चर्चा भी नहीं होने दे रही। राहुल गांधी ने दोहराया कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
सोनिया गांधी भी पहुंची थीं पुलिस स्टेशन
कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं। राहुल को पुलिस ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में डिटेन किया था तो वहीं प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने में हिरासत में रखा गया था। प्रियंका से मिलने सोनिया गांधी भी पहुंचीं थीं, जिसके कुछ देर बाद ही उन्हें रिहा कर दिया गया।
जानें हिरासत में लेने के बाद क्यों हुई कांग्रेस नेताओं की रिहाई
कांग्रेस के सभी नेताओं को 65 दिल्ली पुलिस एक्ट (65 DP Act) में बुक किया गया था और 3 घंटे की हिरासत में रखने के बाद सभी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए उचित और वैध निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है, विरोध करता है, या अनदेखी करता है, तो पुलिस अधिकारी उसे मौके से हटा सकता है, और बिना वारंट के हिरासत में ले सकता है।
नवीन बोले राहुल गांधी अराजकता की राजनीति कर रहे हैं
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास के बाहर धरना देने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की और इसे निंदनीय तथा भारतीय राजनीति के इतिहास में काला दिन करार दिया। नवीन ने आरोप लगाया कि गांधी और कांग्रेस नेताओं ने अराजकता फैलाने के लिए प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। उन्होंने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की भी आलोचना की।
हिरासत से छूटने के बाद प्रियंका ने क्या
प्रियंका गांधी ने हिरासत से छूटने के बाद कहा कि जब हम संसद में चर्चा चाहते हैं, चर्चा नहीं की जाती है। जब नेता विपक्ष संसद में अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें मौका नहीं दिया जाता। जब हम विरोध करने के लिए धरना प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो उसकी परमिशन नहीं दी जाती है। इसलिए आज हम वहां पहुंच गए, जहां सरकार को उम्मीद ही नहीं थी।
कांग्रेस ने भनक तक नहीं लगने दी
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आधिकारिक आवास के एक गेट के निकट धरना देकर न केवल सरकार और पुलिस, बल्कि पार्टी के कई सांसदों को भी चौंका दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेताओं के लिए इतने उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में प्रदर्शन करने के लिए गोपनीयता बनाए रखना जरूरी था, क्योंकि इसकी जानकारी पहले मिल जाती तो इलाके की घेराबंदी की जा सकती थी।
जीतू पटवारी बोले- तानाशाही का दौर शुरू
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र की तानाशाही का दौर शुरू हो गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए जो हो नहीं रहा है और छात्रों के साथ तानाशाही की जा रही है...इस तरह की अराजकता हमने इससे पहले कभी नहीं देखी। राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया, उन्हें संसद में नहीं बोलने दिया गया, छात्रों को पीटा गया, देश के भविष्य को कुचला गया, पेपर लीक हुआ, कई बच्चों ने आत्महत्या भी कर ली लेकिन फिर भी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ। हर पेपर लीक के पीछे भाजपा क्यों? उसके कार्यकर्ता क्यों? यही सवाल है।
संसद के मानसून सत्र के बीच हुआ प्रदर्शन
यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन आयोजित किया गया। इससे एक दिन पहले Cockroach Janata Party (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे। इसी घटना के विरोध में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी को दिया जवाब
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों का राजनीतिक औजार के रूप में बेशर्मी से इस्तेमाल कर अशांति फैला रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया, जिससे जनता को असुविधा हुई और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अवहेलना की गई। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की ओर से व्यापक चर्चा के लिए तत्परता जताने के बावजूद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस के बजाय राजनीतिक तमाशा चुना. उनका मकसद छात्रों के लिए समाधान नहीं था, बल्कि राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए अशांति फैलाना था। राहुल गांधी के लिए यह छात्रों का मुद्दा नहीं है, यह हर संभव चर्चा के रास्ते खुलने के बाद टकराव पैदा करने का मुद्दा है।