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राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण, 150 पन्नों की रिपोर्ट तैयार, ट्रस्ट के पुनर्गठन के भी संकेत

नोट गिनने वालों को हटाया, अब नोट गिनने वालों की कपड़ों में नहीं होगी जेब

Ram Mandir Scam SIT Investigation
Ayodhya Ram Mandir Scam SIT Investigation: अयोध्या में रामलला के दरबार से आई एक ऐसी खबर ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भूकंप ला दिया है, जिसने आस्था और व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन में हुए 7 करोड़ रुपए से अधिक के कथित घोटाले की जांच कर रही SIT अपनी 150 पन्नों की रिपोर्ट संभवत: आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप जा सकती है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उन्हें रिपोर्ट सौंप दी गई है। यह वही विवाद है जिस पर कभी समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी (AAP) ने 200 करोड़ से अधिक की लूट का आरोप लगाकर देश की राजनीति गरमा दी थी, जिसके बाद खुद ट्रस्ट की मांग पर सीएम योगी ने SIT का गठन किया था।

नोट गिनने वाले कर्मचारियों को हटाया

​जांच की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों, संदिग्ध कर्मचारियों और उनके करीबियों के अयोध्या जनपद की सीमा पार करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इस बीच, कुछ बदलाव भी किए गए हैं। पूर्व में नोट गिनने वाले कर्मचारियों को हटा दिया गया है। साथ ही नोट गिनने वालों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है। किसी के भी कपड़ों में जेब नहीं होगी।  ALSO READ: हे राम! चढ़ावा चोरी के बाद अब 40% कमीशन के आरोप से गरमाई अयोध्या

​इन दिग्गजों पर टिकी हैं नजरें

पाबंदियों के दायरे में प्रमुख रूप से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, व्यवस्थापक गोपाल राय सहित उनके कई मातहत और करीबी शामिल हैं। हालांकि माना जा रहा है कि चंपत राय को इस पूरे मामले में क्लीन चिट मिल सकती है। तीन सदस्यीय एसआईटी टीम ने अब तक इस पूरे मामले में 150 से अधिक लोगों से बंद कमरे में पूछताछ की है। इनमें से 25 लोगों की भूमिका को बेहद संदिग्ध माना जा रहा है, जिन पर कभी भी बड़ी गाज गिर सकती है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

​जांच के चौंकाने वाले खुलासे

नोटों की गिनती में भारी हेरफेर : जांचकर्ताओं ने पाया कि रामलला के दानपात्रों से निकलने वाले कैश की गिनती और बहीखाते (लेजर) में भारी विसंगतियां हैं। रोजाना मिलने वाले लाखों रुपए के चढ़ावे का बैंक रिकॉर्ड और लेजर आपस में मेल नहीं खा रहे हैं।
 
​सोने-चांदी और रत्नों का गायब होना : श्रद्धालुओं द्वारा रामलला को श्रद्धा से अर्पित किए गए सोने, चांदी और कीमती रत्नों के आभूषणों के रख-रखाव में भी गंभीर हेराफेरी के आरोप हैं। कई बहुमूल्य संपत्तियों का कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है।
 
सीसटीवी (CCTV) का 45 दिनों का पेच : जांच में एक बड़ी तकनीकी अड़चन यह आई है कि मंदिर के सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों का ही उपलब्ध था, पुराना डेटा डिलीट हो चुका था। फिलहाल फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से पुराना फुटेज रिकवर करने की कोशिश की जा रही है।
 
​शक के दायरे में मुख्य नाम : मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और चढ़ावे की मुख्य जिम्मेदारी संभाल रहे रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव एसआईटी के रडार पर सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, फूलकांत मिश्रा और आभूषणों के प्रभारी कृष्ण देव तिवारी से भी तीखे सवाल-जवाब किए गए हैं।

​ट्रस्ट के बड़े चेहरों से पूछताछ

एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा को भी आमने-सामने बैठाकर लंबी पूछताछ की है। ​सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की इस रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार मंदिर प्रबंधन को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकती है। वर्तमान व्यवस्था को भंग कर नए सिरे से ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जा सकता है। मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS/PCS) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जा सकता है।

धर्म सेना के गंभीर आरोप

​रामलला को विश्वभर से भारी मात्रा में नकदी और जेवरात दान करने वाले दानदाता अब खुद अपनी भेंट की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई दानदाताओं ने रामलला को 60 किलो चांदी की सिल्ली, सोने के जेवरात और खड़ाऊ दान किए थे, लेकिन वर्तमान में उनकी सही स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
 
​धर्म सेना प्रमुख संतोष दूबे ने इस मामले में और बड़ा विस्फोट करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह हेरा-फेरी आज की नहीं बल्कि 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय से चल रही है। चंपत राय की देखरेख में आईं 1200 से अधिक सोने-चांदी व रत्न जड़ित ईंटों और शिलाओं का आज कोई पता नहीं है। आंदोलन के दौरान आए भारी दान की जमकर लूट हुई है, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। इसकी भी गहन जांच होनी चाहिए।

क्या हैं इसके सियासी मायने? 

​इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब समाजवादी पार्टी (SP) और आम आदमी पार्टी (AAP) जैसे विपक्षी दलों ने दान पेटी से करोड़ों रुपए (विपक्ष के दावे के अनुसार 200 करोड़ रुपए से अधिक) की चोरी का आरोप लगाया था। बढ़ते दबाव के बाद खुद ट्रस्ट की मांग पर सीएम योगी ने एसआईटी जांच बैठाई थी।
 
​अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जांच रिपोर्ट पर आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई और फैसले 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए 'संजीवनी बूटी' का काम भी कर सकते हैं और जरा सी चूक होने पर 'वेंटिलेटर' की स्थिति भी पैदा कर सकते हैं। पूरा दारोमदार अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगले कड़े कदम पर टिका है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
लेखक के बारे में
संदीप श्रीवास्तव
संदीप श्रीवास्तव करीब 25 वर्ष से ज्यादा समय से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वेबदुनिया के लिए उत्तर प्रदेश में स्ट्रिंगर के रूप में कार्य करते हैं। .... और पढ़ें
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