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Last Updated :नूरमहल , शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 (19:34 IST)

न विज्ञान का तर्क, न समय की मार, इंतजार के 12 साल, आज भी गुरु के 'जागने' की आस में पथराई हजारों आंखें

Ashutosh Maharaj 12th Samadhi Day
ashutosh maharaj 12th samadhi day divya jyoti jagrati sansthan : जब विज्ञान अपनी सीमाएं तय कर देता है, तब वहां से आस्था का एक ऐसा सफर शुरू होता है जिसे दुनिया की कोई दलील झुठला नहीं पाती। ऐसा ही जालंधर के नूरमहल स्थित 'दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान' (DJJS) में 12 साल से हो रहा है।  
29 जनवरी 2014 की वह तारीख जब डॉक्टरों ने आशुतोष महाराज को 'क्लिनिकली डेड' घोषित कर दिया था। लेकिन उनके भक्तों के लिए यह अंत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत थी। हैरानी की बात यह है कि इन 12 वर्षों में भक्तों की संख्या कम होने के बजाय और बढ़ गई है। संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के 12वें 'समाधि दिवस' पर शिष्यों की आस्था अटूट है और हजारों की संख्या में शिष्य आते हैं।

महासमाधि में हैं गुरु 

भक्त यह मानने को तैयार नहीं कि उनके गुरु उन्हें छोड़कर चले वे आज भी मानते हैं कि वे महासमाधि में हैं। आज तक उनके शरीर की पूजा हो रही है। जो अंतिम संस्कार करना चाहते थे उन्हें आश्रम से भगा दिया गया। 12 साल का लंबा वक्त गुजर गया, सर्दियां आईं और गर्मियां बीत गईं, लेकिन इस डेरे की दीवारों के भीतर वक्त जैसे ठहर सा गया है। यहां विज्ञान और अध्यात्म के बीच की जंग नहीं, बल्कि एक शिष्य का अपने गुरु के प्रति वो प्रेम दिख रहा है, जो मौत की परिभाषा को भी चुनौती दे रहा है।

नूरमहल आश्रम में हजारों की भीड़ 

बुधवार से ही नूरमहल आश्रम में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। दो दिवसीय समाधि कार्यक्रम में हजारों लोग सिर्फ एक उम्मीद के साथ पहुंच रहे हैं कि उनके गुरु एक दिन अपनी चेतना में लौटेंगे। मीडिया खबरों के मुताबिक संस्थान का मानना है कि महाराज ने शरीर का त्याग नहीं किया है, बल्कि वे ब्रह्मांडीय ध्यान में लीन हैं और समय आने पर अपने शिष्यों के बीच वापस लौटेंगे।

मामला कोर्ट भी पहुंचा 

विवाद बढ़ा तो मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा, जहां भक्तों को आशुतोष महाराज का शरीर 3 वर्ष तक फ्रीजर में रखने की अनुमति मिल जाती है। हालांकि 12 वर्ष से अधिक हो गए हैं और आशुतोष महाराज की 'गहरी समाधि' की अवस्था जारी है।

12 साल से सुरक्षित है शव

माइनस 21 डिग्री में महाराज के शव को सुरक्षित रखा गया है। आज भी भक्तों का मेला लगता है। विज्ञान के तमाम उपकरणों और फ्रीजर की मदद से महाराज के शरीर को संरक्षित रखा गया है, लेकिन उनके अनुयायियों के लिए यह मात्र एक शरीर नहीं, बल्कि 'गहरी ध्यान मुद्रा' (समाधि) है। Edited by : Sudhir Sharma
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