छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर लोकसभा में अखिलेश का सरकार पर हमला, पूछा- क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए बुधवार को लोकसभा में सरकार से कड़े सवाल किए। उन्होंने कहा कि यह सपा, कांग्रेस और भाजपा किसी दल का नहीं, बल्कि देश के युवाओं का मुद्दा है। उन्होंने सदन में सवाल किया कि क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? ALSO READ: 'राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों को PM आवास क्यों ले जा रहे थे?' CJP प्रदर्शन के बीच कंगना रनौत का बड़ा हमला
अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संसद में विपक्ष को छात्रों के मुद्दे पर बोलने का अवसर दिया जाता तो प्रधानमंत्री आवास तक जाने की नौबत नहीं आती। उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया।
सपा नेता ने कहा कि छात्रों का मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि छात्र जब अपनी बात नहीं रख पाएंगे तो स्वाभाविक रूप से सड़क पर उतरेंगे। लोकतंत्र में युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए।"यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं छात्र और नौजवानों का है। क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के लिए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं।"
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) July 22, 2026
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/6k1kU9w0Lm
क्या सरकार और कांग्रेस के बीच कोई समझौता हुआ है?
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस हो गई। लोकसभा स्पीकर द्वारा कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को बोलने की इजाजत दिए जाने के बाद अखिलेश ने सवाल उठाया कि क्या सरकार और कांग्रेस के बीच कोई समझौता हो गया है। ALSO READ: हिंदुस्तान कमाल है, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और पूरे भारत ने Zomato-Swiggy के ज़रिए छात्रों तक सिर्फ खाना नहीं, हौसला भी पहुंचाया, सलाम है आपको!
अखिलेश से नाराज हुए केसी वेणुगोपाल ?
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल सपा प्रमुख अखिलेश यादव की इस टिप्पणी से नाराज दिखे। सदन स्थगित होते ही उनका सामना अखिलेश से हुआ तो उन्होंने अपनी नाराजगी जताई। इस पर अखिलेश ने कहा कि इस्तीफे तो बाद में भी दिए जा सकते हैं लेकिन पहले हम छात्रों पर की गई बर्बरता पर सरकार से जवाब चाहते हैं।
अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संसद में विपक्ष को छात्रों के मुद्दे पर बोलने का अवसर दिया जाता तो प्रधानमंत्री आवास तक जाने की नौबत नहीं आती। उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया।

