नारी शक्ति वंदन अधिनियम : देश की आधी आबादी ने किया स्वागत; राजनीति में बढ़ेगा महिलाओं का कद
देश में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने वाला 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' भारतीय लोकतंत्र के लिए एक संभावित ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाना नहीं, बल्कि महिलाओं को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में जोड़कर महत्वपूर्ण भूमिका देना है। राजनीति में आरक्षण की यह पहल उस वैश्विक अंतर को भी कम करने की दिशा में कारगर साबित होगी जहां 2023 तक विश्व स्तर पर संसदों में महिलाओं की औसत भागीदारी लगभग 26.9% रही, जबकि भारत इससे पीछे है।
सरकार द्वारा 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाए गए विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक-केंद्र शासित प्रदेश क़ानून (संशोधन) विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 है, जो इस बदलाव की आधारशिला रखेंगे। यदि ये प्रस्ताव समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं, तो देश की चुनावी और प्रतिनिधित्व प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
नारी शक्ति साहित्यकार, शिक्षाविद, डॉक्टर और प्रोफेशनल ने महिला आरक्षण कानून को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री की प्रशंसा की है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर पूरे देश की महिलाएं तो उत्साहित हैं और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का स्वागत कर रही है। इसी संदर्भ में 'वेबदुनिया' आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की राय से रूबरू हुआ है...
भारतीय जनता पार्टी की पूर्व राज्य सभा सांसद और प्रदेश उपाध्यक्ष कांता कर्दम ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान, भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह बदलाव महिलाओं को केवल लाभार्थी से आगे बढ़ाकर निर्णयकर्ता की भूमिका में लाता है।
महिला सम्मान के लिए मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और 'मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना' के जरिए महिलाओं को नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को ब्रांड के रूप में विकसित किया जा रहा है।
महिला उद्यमी डॉ. नूपुर गर्ग ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी प्रयास है। इससे महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि यह पल शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती, दो बेटियों की मां है, बच्चे आगे बढ़ रहे हैं।
एक समय वो तो, जब महिलाएं काम के लिए बाहर जाती थीं तो उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता घर और कार्यस्थल पर लेकिन आज कंपनियों में महिलाओं को डिलीवरी के बाद छह माह तक का अवकाश दिया जाता है, इस दौरान पूरी सैलरी भी मिलती है यह बड़ा परिवर्तन आया है।
अर्जुन अवॉर्डी पहलवान अलका तोमर का कहना है कि देश में महिलाएं मतदान और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रही हैं, इस अभियान से राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और नीतियां अधिक समावेशी व संवेदनशील बनती हैं। आर्थिक समृद्धि देश की प्रगति में चार चांद लगाएंगी।
युवा उद्यमी नव्या दत्ता ने कहा कि महिलाओं की राजनीति में अधिक सहभागिता से आर्थिक प्रगति होगी। महिला आज सभी क्षेत्रों में अग्रणी है, मेरी कंपनी महिलाओं को ट्रक चलाने की ट्रेनिंग देती है, यह स्वालंबन की दिशा में बहुत कारगर साबित है रहा है कि महिलाएं अब किसी से कम नहीं हैं। यह सब सरकार की वजह से हो रहा है, महिला आरक्षण मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व की क्षमता बढ़ेगी।
महिलाओं से बातचीत के बाद कहा जा सकता है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को केवल एक विधायीपरिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल हो सकती है, जो भारत में लोकतंत्र के एक नए युग का सूत्रपात कर सकता है।
Edited By : Chetan Gour
Edited By : Chetan Gour
