सम्बंधित जानकारी
- अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो....
- 2026 की सबसे डिमांडिंग नौकरियां! अगर सीख लीं ये 3 स्किल्स, तो कंपनियां देंगी 30 लाख रुपए तक का पैकेज!
- Top News : 183 रुपये सस्ता हुआ कमर्शियल LPG, VB-G RAM G कानून लागू
- Operation Tiger: क्या देवेंद्र फडणवीस के साथ भी वही हो रहा है जो कभी आडवाणी, गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के साथ हुआ था?
- राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कांग्रेस का PM मोदी पर बड़ा हमला, बोली- श्रेय लिया तो जिम्मेदारी भी लें
"नेताओं को राजनीतिक मजाक बर्दाश्त करना चाहिए": राघव चड्ढा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा नेता राघव चड्ढा मामले में बुधवार को बड़ा फैसला किया। अदालत ने सोशल मीडिया से 5 मानहानिकारक पोस्ट हटाने के आदेश दिया। बाकी कंटेंट हटाने की मांग खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि नेताओं को राजनीतिक मजाक को बर्दाश्त करना चाहिए। व्यंग्यात्मक आलोचना का मतलब हमेशा मानहानि नहीं होता। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो....
मजाक राजनीति का एक अहम हिस्सा
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन, कामकाज या नीतियों में बदलाव को लेकर मजाक राजनीति का एक अहम हिस्सा है। किसी भी पार्टी के नेता के किसी भी काम पर जनता या विरोधी पार्टियों के सदस्यों की तरफ से आलोचना हो सकती है। कभी-कभी यह आलोचना व्यंग्यात्मक मजाक के रूप में भी सामने आ सकती है।
'पर्सनैलिटी राइट्स' का कोई मामला नहीं
राघव चड्ढा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पैसे के लिए खुद को बेचने के आरोप वाले कंटेंट को हटाने की मांग की थी। उन्होंने अपने पर्सनैलिटी और प्राइवेसी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी।
मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने राघव चड्ढा के खिलाफ पोस्ट किए गए 5 मानहानि करने वाले कंटेंट को हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उनके केस में 'पर्सनैलिटी राइट्स' का कोई मामला शामिल नहीं है। ALSO READ: एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल बना वाहनों का 'दुश्मन'? इंदौर के मैकेनिकों की चौंकाने वाली रिपोर्ट
अंतरिम अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखते हुए जस्टिस प्रसाद ने कहा कि प्रथम दृष्टया, विवादित पोस्ट में चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के राजनीतिक फैसले की आलोचना थी और मानहानि और आलोचना के बीच की रेखा बहुत बारीक है।
