खेती और मौसम की सटीक समझ रखने वाले कवि घाघ का एक दोहा है— "एक बूंद जो चैत में परै, सकल बूंद सावन में टरै"। मौसम विज्ञान ने चाहे जितनी तरक्की कर ली हो, घाघ ने खेतीबाड़ी के हर विषय—खाद, पानी, बीज, जुताई, खेत की तैयारी, बारिश, वायु, अकाल, पैदावार और नक्षत्रों—पर जो कुछ लिखा है, वह आज भी कमोबेश प्रासंगिक है।
खेतीबाड़ी के लिए आसार अच्छे नहीं
उक्त दोहे के संदर्भ में देखें तो चैत से शुरू हुई बेमौसम बारिश, तेज हवा, आंधी और ओलों का सिलसिला बैशाख में भी रुक-रुक कर जारी है। यह न सिर्फ मौजूदा रबी फसलों के लिए नुकसानदेह है, बल्कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए भी चिंता का संकेत है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि खेतीबाड़ी के लिए आसार अच्छे नहीं हैं।
बेमौसम बारिश से किसान और सरकारें चिंतित
मौसम का यह अप्रत्याशित रवैया किसानों और सरकार—दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। घाघ के दोहे के अनुसार, चैत में अधिक बारिश होने पर सावन में वर्षा कम हो सकती है। जबकि सावन को सामान्यतः सर्वाधिक बारिश का महीना माना जाता है। धान की रोपाई जून (आषाढ़) के दूसरे पखवाड़े से शुरू होती है और सावन में उसकी तेज बढ़वार होती है। इस समय पर्याप्त पानी आवश्यक होता है। ऐसे में सावन में संभावित कमी चिंता बढ़ा रही है।
रबी फसलों को हुआ नुकसान
घाघ का एक और दोहा है— "गेहूं गिरे अभागे का, धान गिरे सुभागे का"। मार्च के दूसरे-तीसरे सप्ताह में जब मौसम बदला, उस समय गेहूं की फसल लगभग तैयार थी। तेज पछुआ हवा और बारिश के कारण कई जगह फसल गिर गई, जिससे दानों की गुणवत्ता और चमक प्रभावित हुई। सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचा।
जायद फसल, सब्जियां और आम पर असर
बेमौसम बारिश, आंधी और ओलों ने जायद की फसलों—खीरा, तरबूज, खरबूजा, लौकी, कद्दू, टमाटर—को भी भारी नुकसान पहुंचाया। जलभराव से जड़ सड़न बढ़ी। ओलों और हवाओं से पौधे टूटे। फल फटकर दागी हो गए। फफूंदी जनित रोग बढ़े। प्याज, मक्का और ज्वार जैसी फसलें भी प्रभावित हुईं।
आम की फसल पर सबसे ज्यादा मार
उत्तर प्रदेश, खासकर लखनऊ और मलिहाबाद जैसे क्षेत्रों में आम की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। बौर झड़ गए, छोटे फल गिर गए, फंगल रोग (एंथ्रेक्नोज) बढ़ा, प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, आम की फसल को 15–20% तक नुकसान हो सकता है।
क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) असामान्य रूप से सक्रिय है। जलवायु परिवर्तन के कारण अब यह सिर्फ सर्दियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वसंत (चैत-बैशाख) में भी प्रभाव दिखा रहा है। इसके चलते उत्तर भारत में बार-बार बारिश, आंधी और ओले पड़ रहे हैं।
सरकार और राहत के उपाय
मौसम विभाग ने आगे भी कुछ क्षेत्रों में खराब मौसम की संभावना जताई है। किसानों को सलाह दी गई है कि—
फसल की जल्द कटाई करें, बीमा दावे तैयार रखें, केंद्र और राज्य सरकारें नुकसान का आकलन कर रही हैं और—
फसली बीमा का निस्तारण, बीजों पर अनुदान, फ्री किट वितरण, जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष : कुल मिलाकर, मौसम की इस अनिश्चितता ने किसानों और बागवानों पर चौतरफा मार पड़ी है।यदि सावन में भी वर्षा कम रही, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।