मदर्स डे को मई के दूसरे रविवार को मनाने के पीछे एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी है। इसकी शुरुआत किसी उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटी के अपनी मां के प्रति सम्मान और एक सामाजिक सुधार की भावना के साथ हुई थी। आइए जानते हैं इसका दिलचस्प इतिहास।
1. अन्ना जार्विस: वह महिला जिन्होंने शुरुआत की
मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय अमेरिका की अन्ना जार्विस (Anna Jarvis) को जाता है। अन्ना अपनी मां, एन रीव्स जार्विस से बहुत प्यार करती थीं। उनकी मां एक शांति कार्यकर्ता थीं जो गृहयुद्ध (Civil War) के दौरान घायल सैनिकों की सेवा करती थीं। उनकी इच्छा थी कि दुनिया में एक दिन ऐसा हो जो माताओं के बलिदान और उनके काम को समर्पित हो।
2. 1905 से शुरू हुआ संघर्ष
जब 1905 में अन्ना की मां का निधन हुआ, तो उन्होंने अपनी मां की उस इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया। उन्होंने तर्क दिया कि एक बच्चा अपनी मां के लिए जो करता है, वह दुनिया के किसी भी अन्य व्यक्ति के मुकाबले सबसे बड़ा होता है।
3. मई का दूसरा रविवार ही क्यों?
मां की पुण्यतिथि: अन्ना जार्विस की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस वर्ष मई का दूसरा रविवार था।
श्रद्धांजलि: अपनी मां की याद में अन्ना ने 1908 में वर्जीनिया के ग्राफ्टन में एक मेमोरियल सर्विस आयोजित की। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अपनी मां का पसंदीदा फूल 'सफेद कार्नेशन' (White Carnation) बांटा।
4. आधिकारिक मान्यता: 1914 का ऐतिहासिक दिन
अन्ना जार्विस के लंबे संघर्ष और कैंपेन के बाद, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) ने 9 मई 1914 को एक कानून पारित किया। इसमें घोषणा की गई कि हर साल मई के दूसरे रविवार को 'मदर्स डे' के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहेगा।
मदर्स डे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
कार्नेशन फूल का महत्व: अन्ना जार्विस ने सफेद कार्नेशन को माँ के प्रतीक के रूप में चुना था क्योंकि यह माँ के प्यार की तरह 'शुद्ध' और 'सफेद' होता है। बाद में, जीवित माँ के लिए लाल कार्नेशन और स्वर्गवासी माँ के लिए सफेद कार्नेशन पहनने की परंपरा शुरू हुई।
अन्ना जार्विस का अफसोस: जैसे-जैसे यह दिन लोकप्रिय हुआ, कंपनियों ने इसे व्यापार (कार्ड, फूल, उपहार) का जरिया बना लिया। अन्ना को यह व्यावसायिकता इतनी नापसंद थी कि उन्होंने बाद में इस दिन का विरोध भी किया था, क्योंकि वह इसे पूरी तरह से 'भावनाओं' का दिन रखना चाहती थीं।
भारत और दुनिया: आज भारत सहित दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में मई के दूसरे रविवार को ही मदर्स डे मनाया जाता है, हालाँकि कुछ देशों में इसकी तारीखें अलग भी हैं (जैसे ब्रिटेन में मार्च में)।
मदर्स डे 2026 इस बार 10 मई को पड़ रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भले ही हम हर दिन मां को याद करें, लेकिन एक विशेष दिन उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित करना एक सुखद एहसास है।