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जन्‍मदात्री है वह...

शुक्रवार,मई 6, 2011
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वेलेंटाइन-डे पर जिस तरह बाजार में रौनक रहती है और बाजारवादी तमाम तरह के ग्रीटिंग कार्ड बेचने में लगे रहते हैं और प्रेमी-प्रेमिका भी अपने प्रेम का इजहार करने के लिए अति व्याकुल हो जाते हैं तथा मीडिया भी बढ़-चढ़कर वेलेंटाइन-डे के प्रचार-प्रसार में जुट ...
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मां के आंचल की छाया

शुक्रवार,मई 6, 2011
देखो पहाड़ की चोटी पर बंजारे बादलों ने डेरा डाला है कुछ बूंदें समेटने के लिए धरती ने आंचल फैलाया है। स्नेह भरा एक आंचल सूना-सा एक गांव, बंजर-सी एक धरती हमारी तकते हैं राह क्या सताते नहीं तुम्हें वो मिटटी, आंगन, अश्वत्थ की छाया अक्सर बाबा की मार से ...
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मां, तुझको गले लगाना है

शुक्रवार,मई 6, 2011
मैं रोया यहां दूर देस वहां भीग गया तेरा आंचल तू रात को सोती उठ बैठी हुई तेरे दिल में हलचल जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है मां सब गम ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है मां जीवन का कैसा खेल है ये मां तुझसे दूर हुआ हूं मैं वक्त के हाथों की ...
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आज मातृ दिवस है। यह दिन 'मात्र' दिवस बन कर ना रह जाए, इसलिए शब्दों के गंधरहित फूल और भावनाओं के छलछलाते अर्घ्य को लेकर आपके समक्ष उपस्थित हूं। इस एक पाती को आप अपनी 'कृतज्ञ' से लेकर मेरी तरह 'कृतघ्न' संतानों का कटघरा मान सकतीं हैं।
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मां देहरी पर सजती कुंकुम रंगोली है, घर को आलोकित करता निष्कंप दीपक है, अंजुलि से 'आदित्य' को चढ़ता आस्था का अर्घ्य है और चमकते चंद्रमा सा एक शीतल धैर्य है। वह जीवन की पाठशाला की गुरुजी ही नहीं बल्कि चॉक, कलम, पट्‍टी और तड़ातड़ पड़ती छड़ी भी वही है।
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उस रात मैंने हर देवी-देवता को याद किया था। दिल से रोते हुए मेरी एक ही प्रार्थना थीं कि बस मां को कुछ ना हो। मेरी मां मेरे लिए क्या और कितना महत्व रखती है यह मैंने सही मायनों में उसी रात जाना था। उसी रात मैंने अपने उन सारे झगड़ों के लिए भगवान से माफी ...
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अब मैं जान गई हूं, मां

शुक्रवार,मई 6, 2011
जीवन के इक्कीस वर्ष बाद, मां जानी मैंने तुम्हारी पीड़ा जब अपना अंश अपनी बिटिया अपनी बांहों में पाई मैंने। मेरे रोने पर तुम छाती से लगा लेती होगी मुझे, यह तो मुझे ज्ञात नहीं पर घुटने-कोहनी जब छिल जाते थे गिरने पर याद है मुझे तुम्हारे चेहरे की वो ...
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मैं चाहती हूं मेरी बच्ची मेरे न होने के बाद तुम भूल न जाना वह बंधन जो मैंने महसूस किया है नौ महीनों तक। सिर्फ शरीर से साथ न होगी पर मां के वात्सल्य की छाया तुमसे कभी भी दूर न होगी। तस्वीरों से मां को जान न पाओगी वो होती तो कैसे जताती प्यार ये सोचकर ...
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आंचल में समेटती है मां

शुक्रवार,मई 6, 2011
भोर के सूरज की उजास लिए जीवनभर रोशनी-सी बिखेरती है मां, दुःख के कंकर बीनती रहती सुख थाली में परोसती है मां, स्नेह की बौछारों से सींचकर सहेजती है जीवन का अंकुर रामरक्षा के श्लोकों की शक्ति आंचल में समेटती है मां, अपनी आंख के तारों के लिए स्वप्न बुनती ...
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गीली आंखें, अम्मा आंचल

शुक्रवार,मई 6, 2011
धूप घनी तो अम्मा बादल छांव ढली तो अम्मा पीपल गीली आंखें, अम्मा आंचल मैं बेकल तो अम्मा बेकल। रात की आंखें अम्मा काजल बीतते दिन का अम्मा पल-पल जीवन जख्मी, अम्मा संदल मैं बेकल तो अम्मा बेकल। बात कड़ी है, अम्मा कोयल कठिन घड़ी है अम्मा हलचल चोट है छोटी, ...
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पावन रिश्ता है जिसमें कोई कपट नहीं होता। कोई प्रदूषण नहीं होता। इस एक रिश्ते में निहित है छलछलाता ममता का सागर। शीतल और सुगंधित बयार का कोमल अहसास। इस रिश्‍ते की गुदगुदाती गोद में ऐसी अव्यक्त अनुभूति छुपी है जैसे हरी, ठंडी व कोमल दूब की बगिया में ...
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मदर्स डे पर भेजिए संदेश

शुक्रवार,मई 6, 2011
मां, माताजी, आई, मम्मी, अम्मा से लेकर मम्मा तक हर मां एक भीने-भीने रिश्ते का प्रतीक है। मातृ दिवस पर हर बच्चे की यह अहम जिम्मेदारी है कि वह मां के प्रति अपने प्यार का, अपने सम्मान का और अपनी रेशमी छलछलाती अनुभूतियों का इज़हार करें।
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