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दिवाली 2019 : Diwali पर क्यों चढ़ाते हैं मां लक्ष्मी को खील-बताशे... कौन सा ग्रह होता है खुश इस प्रसाद से

रविवार,अक्टूबर 13, 2019
deepavali 2019
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दिवाली, दीपावली के 5 दिन धन के संकट दूर करने के लिए सबसे शुभ माने गए हैं। शास्त्रानुसार व्यक्ति यदि अपने मूल कर्ज से निवृत्ति का उपाय नहीं करता है, तो उसे इस जीवन में अर्थ, उपकार, दया के रूप में किसी भी तरह का उधार लेना ही पड़ता है। इस उधार को उतारने ...
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करवा चौथ या करक चतुर्थी विशेषकर स्‍त्रियों का सुहाग पर्व है। इस व्रत को करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस बार यह पर्व 17 अक्टूबर 2019 को आ रहा है। आइए जानें इस दिन क्या करें।
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करवा चौथ 17 अक्टूबर 2019 को है। आइए जानें, कैसे मनाया जाता है सौभाग्य का यह पर्व...
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17 अक्टूबर 2019 को करवा चौथ व्रत कर रही हैं, तो आपको ये बातें भी जरूर जाननी चाहिए। सब कुछ करने के बाद भी यदि इन कामों को नहीं किया गया तो आपको व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होगा। आइए जानते हैं कि ऐसे कौन-कौन से जरूरी काम हैं, जो आपको करवा चौथ के दिन ...
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करवा चौथ के खूबसूरत पर्व पर पौराणिक मान्यता के अनुसार कुछ उपाय भी किए जाते हैं आइए जानते हैं...
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इस रात श्वेत आसन पर बैठकर चांदी की थाली में मखाने, खीर, चावल और सफेद फूल का भोग चंद्रदेव को लगाएं।
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शरद पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है तथा कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। इस मौके पर आइए जानते हैं पौराणिक एवं प्रचलित कथा...
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क्या आप जानते है आपको यदि कर्ज की समस्या है तो शरद पूर्णिमा के दिन आपको कर्ज से मुक्ति मिल सकती है कैसे आइए जानते हैं...
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चंद्र देवता हिंदू धर्म के अनेक देवतओं मे से एक हैं। उन्हें जल तत्व का देव कहा जाता है। चंद्रमा की महादशा दस वर्ष की होती है। चंद्रमा के अधिदेवता अप्‌ और प्रत्यधिदेवता उमा देवी हैं।
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चन्द्रमा माता का सूचक और मन का कारक है। कुंडली में चन्द्र के अशुभ होने पर मन और माता पर प्रभाव पड़ता है। लाल किताब के अनुसार कुंडली में चन्द्र के दोषपूर्ण या खराब होने की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया गया है। यहां जानिए शरद पूर्णिमा पर ...
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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा व भगवान विष्णु का पूजन कर, व्रत कथा पढ़ी जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। इस मौके पर आइए जानते हैं पौराणिक एवं प्रचलित कथा...
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सुंदर सलोने चंद्रमा को देवताओं के समान ही पूजनीय माना गया है। चंद्रमा के जन्म की कहानी पुराणों में अलग-अलग मिलती है।
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दशहरे से शरद पूर्णिमा तक चंद्रमा की चांदनी विशेष गुणकारी, श्रेष्ठ किरणों वाली और औषधियुक्त होती है। इस समयावधि की रातों में शीतल चंद्रमा की चांदनी का लाभ उठाना चाहिए।
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बड़ी ही उत्तम तिथि है शरद पूर्णिमा। इसे कोजागरी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। कहते हैं यह दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां टल जाती हैं।
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संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महापुरुष मानव जाति के प्रकाश पुंज हैं, जो मनुष्‍य को धर्म की प्रेरणा देकर उनके जीवन के अंधेरे को दूर करके उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाने का महान कार्य करते हैं।
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राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागरजी ने राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी अजमेर में आषाढ़ सुदी पंचमी विक्रम संवत्‌ 2025 को लगभग 22 वर्ष की आयु में संयम-धर्म के परिपालन हेतु उन्होंने पिच्छी कमंडल धारण करके मुनि दीक्षा धारण की थी।
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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निस दिन सेवत हर-विष्णु-धाता॥ ॐ जय...उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय...
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महालक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो पढ़ें लक्ष्मी चालीसा- मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
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करवा चौथ और करक चतुर्थी पर्याय है। चन्द्रोदय तक‍ निर्जल उपवास रखकर पुण्य संचय करना इस पर्व की विधि है। चन्द्र दर्शनोपरांत सास या परिवार में ज्येष्ठ श्रद्धेय नारी को बायना देकर 'सदा सौभाग्यवती भव' का आशीर्वाद लेना व्रत साफल्य की पहचान है।
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