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Written By WD

आगामी अतीत : रोमांटिक उपन्यास

राजकमल प्रकाशन

आगामी अतीत
पुस्तक के बारे में
ND
आगामी अतीत की शैली रोमांटिक उपन्यासों वाली है लेकिन इस रोमांटिकता में एक गहरी टीस है। एक ऐसी कसक है इस उपन्यास में, जो सामाजिक-आर्थिक निर्भरताओं से उपजी है। परंपरावादी रोमांटिक कहानियों की लीक से हटकर कमलेश्वर के इस उपन्यास में रोमांटिकता की काट के लिए रोमांटिकता का ही उपयोग किया गया है। कमलेश्वर के लेखन की एक ऐसी जादूगरी है आगामी अतीत में, जो अपने अंतिम पृष्ठ तक पहुँचते-पहुँचते पाठकों को चमत्कृत और अचम्भित करती है।

पुस्तक के चुनिंदा अंश
' पता नहीं अब कैसी होगी चंदा। होगी भी या नहीं? उसी घर में होगी या कहीं और? उसके बूढ़े बाप का क्या हाल होगा? वे जीवित होंगे या नहीं? वह मकान उसी जगह होगा या नहीं? चंदा ने उनके जाने के बाद कब तक प्रतीक्षा की होगी? की भी होगी या नहीं? शायद शादी करके वह घर-गृहस्थी बसाकर अपने में खुश हों और अब उसका इस तरह पहुँचना ठीक ना हो। वह पहचाने या ना पहचाने...!'
***

'सफलता ही अगर सबकुछ होती तो मेरे दोस्त, आज सबसे ज्यादा खुश आदमी तुम्हीं होते... मैं भी नंदा देवी पर एक दिन पहुँचा था, सफलता का थ्रिल... रोमांच... एक दूसरी चीज है दोस्त, पर सफलता का हासिल? हासिल है सिर्फ बर्फीला ठंडापन। नंदा देवी की बर्फानी चोटी पर खड़े होकर एक क्षण के लिए मैंने सत्य के दर्शन किए थे। सफलता का रोमांच और सफलता का हासिल ये कतईं दो बातें हैं। '
***

' वह आए तो चाँदनी शोखी से उन्हें देखने लगी। अपना घाघरा उसने घुटनों तक सरकाया हुआ था। कमल बोस आकर खड़े हुए तो उन्होंने छड़ी से उसका घाघरा नीचे करके उसकी टाँगे ढँक दी थीं। चाँदनी ने उन्हें देखते हुए फिर घाघरा ऊपर सरकाकर और ज्यादा टाँगे खोल ली थीं। कमल बोस ने फिर छड़ी से उसे सरकाकर टाँगें ढँक दी थीं। उसने जिद में फिर खोली थीं तो कमल बोस ने हल्के से उसे छड़ी मार दी थीं।
***

समीक्षकीय टिप्पणी
पूँजीवादी समाज के स्पर्धामूलक परिवेश की विडंबना और अन्तर्विरोध ही ही इस उपन्यास का मुख्य कथ्य है। सन् 1973-74 के आस-पास लिखे गए इस उपन्यास की सार्थकता आज के भूमंडलीकरण के दौर में सामने आ चुकी है। आर्थिक आपाधापी के कारण टूट रहे स्त्री-पुरुष संबंधों को इस उपन्यास में पहले ही हमारे सामने रख दिया गया है। और उस नारी की पीड़ा को भी जो इस दौर की विकृतियों को सह रही है।

उपन्यास : आगामी अतीत
लेखक : कमलेश्वर
प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन
पृष्ठ : 104
मूल्य : 95रुपए
लेखक के बारे में
WD