0

रामायण और महाभारत काल में थे महर्षि दुर्वासा ऋषि

मंगलवार,अप्रैल 6, 2021
0
1
महाभारत यूं तो सैंकड़ों घटनाओं का संग्रह है, परंतु फिर भी कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो जनमानस में प्रचलित हैं। आओ ऐसी ही घटनाओं की एक लिस्ट पर नजर डालते हैं।
1
2
महाभारत में द्युतक्रीड़ा के समय युद्धिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया और दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि ने द्रोपदी को जीत लिया। उस समय दुशासन द्रौपदी को बालों से पकड़कर घसीटते हुए सभा में ले आया। जब वहां द्रौपदी का अपमान हो रहा था तब भीष्मपितामह, ...
2
3
व्याथ गीता में मार्कण्डेय ऋषि युधिष्ठिर को ज्ञान देते हैं। यह गीता में महाभारत का हिस्सा है। दरअसल, इस गीता में एक शिकारी या कहें कि बहेलिया एक ब्राह्मण संन्यासी को शिक्षा देता है। यह कथा हमें महाभारत के वन पर्व में पढ़ने को मिलती है। यह कथा ...
3
4
धृतराष्ट्र ने समझाया कि पुत्र, यदि केवल 5 गांव देने से युद्ध टलता है, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है इसलिए अपनी हठ छोड़कर पांडवों से संधि कर लो ताकि ये विनाश टल जाए। दुर्योधन अब गुस्से में आकर बोला कि पिताश्री, मैं एक तिनके की भी भूमि उन पांडवों को ...
4
4
5
कुरुक्षेत्र में कौरव और पांडवों की लड़ाई में दुर्योधन कौरवों का सबसे बड़ा भाई था। दुर्योधन अधर्मी, जिद्दी और मूर्ख भी था। वह गांधारी और धृतराष्ट्र का पुत्र एवं कर्ण का मित्र था, परंतु वह अधिकतर बातें अपने मामा शकुनि की ही मानता था। दुर्योधन की जिद, ...
5
6
रामायण और महाभारत काल में भी मंदिर होते थे। इस बात के कई प्रमाण मिल जाएंगे। रामायण काल में मंदिर होते थे, इसके प्रमाण हैं। राम का काल आज से 7129 वर्ष पूर्व था अर्थात 5114 ईस्वी पूर्व। राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी। इसका मतलब यह कि ...
6
7
एकलव्य के संबंध में बहुत भ्रम फैला हुआ है। एकलव्य एक राजपुत्र थे, भील थे, आदिवासी थे, निषाद थे या कि और कोई? क्या सच में ही गुरु द्रोणाचार्य ने इसलिए उन्हें शिक्षा नहीं दी क्योंकि वे एक भील थे? इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जाती है। आओ जानते हैं ...
7
8
ऐसे कई योद्धा थे जो महाभारत के युद्ध या कहें कि कुरुक्षेत्र के युद्ध में भाग लेने से वंचित रह गए। यह भी कह सकते हैं कि श्रीकृष्ण की नीति के चलते ही ऐसा हुआ। आओ जानते हैं उन महान योद्धाओं के नाम जो महान युद्ध का हिस्सा नहीं बन सकते और यदि वे इस युद्ध ...
8
8
9
भीम ने दुर्योधन की जंघा उतार दी थी। वह खून में लथपथ होकर रणभूमि पर गिरा हुआ था। बस, कुछ ही समय में दम तोड़ने वाला था लेकिन भूमि पर गिरे हुए ही उसने श्रीकृष्ण की ओर देखते हुए अपने हाथ की तीन अंगुलियों को बार-बार उठाकर कुछ बताने का प्रयास किया। पीड़ा ...
9
10
रामेश्वर कुण्ड, एक समय श्री कृष्ण इसी कुण्ड के उत्तरी तट पर गोपियों के साथ वृक्षों की छाया में बैठकर श्रीराधिका के साथ हास–परिहास कर रहे थे।
10
11
हज़ार साल के युद्ध और तपस्या के बाद फिर एक कवच टूटा और नारायण की मृत्यु हो गयी। फिर नर ने आकर नारायण को पुनर्जीवित कर दिया, और यह चक्र फिर फिर चलता रहा।
11
12
कर्ण ने कृष्ण से पूछा - मेरा जन्म होते ही मेरी माँ ने मुझे त्याग दिया। क्या अवैध संतान होना मेरा दोष था ? द्रौपदी स्वयंवर में मेरा अपमान किया गया।
12
13
भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं में दक्ष थे। एक ओर वे सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे, तो दूसरी ओर वे द्वंद्व युद्ध में भी माहिर थे। इसके अलावा उनके पास कई अस्त्र और शस्त्र थे। उनकी नारायणी सेना महाभारत काल की सबसे खतरनाक सेना थी। श्रीकृष्ण ने ही कलारिपट्टू नामक ...
13
14
महाभारत में कुं‍ती पुत्र युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम एवं माद्री पुत्र नकुल और सहदेव की पत्नी द्रौपदी थीं। राजा द्रुपद की बेटी द्रौपदी को पांचाली भी कहा जाता है। द्रौपदी दिखने में बहुत ही सुंदर थी। पांचों पांडवों ने अन्य महिलाओं से भी विवाह किया था जैसे ...
14
15
जब पितामह भीष्म बाणों की शैया पर लेते हुए थे तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा:- भीष्म जीवन और मृत्यु के बीच लटक रहे हैं। जाओ, उनसे जो कुछ पूछना है, पूछ लो।' युधिष्ठिर, कृष्ण, कृप और पाण्डवों के साथ कुरुक्षेत्र में पहुंचे। मृत्यु शय्या पर पड़े हुए ...
15
16
शरशय्या पर लेटने के बाद भी भीष्म प्राण नहीं त्यागते हैं। भीष्म के शरशय्या पर लेट जाने के बाद युद्ध और 8 दिन चला और इसके बाद भीष्म मैदान में अकेले लेटे रहे। भीष्म यद्यपि शरशय्या पर पड़े हुए थे फिर भी उन्होंने श्रीकृष्ण के कहने से युद्ध के बाद ...
16
17
भीष्म पितामह शरशय्या पर 58 दिन तक रहे। उसके बाद उन्होंने शरीर त्याग दिया तब माघ महीने का शुक्ल पक्ष था। आओ जानते हैं कि इस दौरान उन्होंने जो शिक्षा दी उसमें से 11 खास सीख।
17
18
कहते हैं कि श्रीकृष्ण के तीसरे गुरु घोर अंगिरस थे। ऐसा कहा जाता है कि घोर अंगिरस ने देवकी पुत्र कृष्ण को जो उपदेश दिया था वही उपदेश श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में दिया था जो गीता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। छांदोग्य उपनिषद में उल्लेख मिलता है कि ...
18
19
भविष्य पुराण के अनुसार शिवजी से युद्ध करने के कारण पांडवों को कलियुग में पुनः जन्म लेना पड़ा था। कहते हैं कि जब आधी रात के समय अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य ये तीनों पांडवों के शिविर के पास गए और उन्होंने मन ही मन भगवान शिव की आराधना कर उन्हें ...
19