युद्ध के कारण बारदाना संकट के फिर टली मध्यप्रदेश में गेहूं की खरीदी, 10 अप्रैल नई तारीख
भोपाल। मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध के चलते अब पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। पेट्रोलियम उत्पादों की किल्लत के कारण पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैग का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश प्रदेश में गेहूं के भंडारण के लिए पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैग के बोरों की कमी हो गई है।
बारदाने की कमी के चलते एक बार फिर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी की तारीख बढ़ा दी गई है। अब प्रदेश के 6 संभाग इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल में गेहूँ की खरीदी का कार्य 10 अप्रैल से प्रारंभ से शुरु होगा। वहीं प्रदेश के अन्य संभागों में गेहूं की खरीदी 15 अप्रैल से शुरु होगी। गौरतलब है कि प्रदेश में गेहूं खरीदी की तारीख तीसरी बार बढ़ाई गई है। गौरतलब है कि प्रदेश में इस वर्ष लगभग 12 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है और करीब 100 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी का अनुमान है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि कैबिनेट समिति ने निर्णय लिया है कि इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में गेहूँ की खरीदी का कार्य 10 अप्रैल से प्रारंभ किया जाएगा। प्रदेश के शेष संभागों में उपार्जन कार्य 15 अप्रैल से शुरू होगा। सरकार ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें खरीदी केंद्रों की स्थापना, भंडारण क्षमता, परिवहन व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना शामिल है।
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि बैठक में वैश्विक परिदृश्य, विशेष रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खाद्यान्न आपूर्ति एवं भंडारण व्यवस्था पर विशेष चर्चा की गई। समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों से गेहूँ खरीदी की प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो और भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि समय पर और व्यवस्थित गेहूँ खरीदी से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि प्रदेश में खाद्यान्न प्रबंधन भी सुदृढ़ होगा। इसके साथ ही, बदलते वैश्विक हालातों के बीच यह कदम राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
गेहूं खरीदी में देऱी से बढ़ेगी किसानों की समस्या- प्रदेश में गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ने का सबसे सीधा असर प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा। होली के बाद अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर किसानों की फसल पककर तैयार हो चुकी है और बड़ी संख्या में किसानों की फसल कट भी गई है। बड़ी संख्या में किसानों के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण फसल के खराब होने की आंशका भी रहेगी। इसके साथ खेतों में खड़ी तैयार फसल पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का खतरा भी बना रहता है। इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए पैसों की आवश्यकता होती है, ऐसे में सरकारी खरीदी में देरी उन्हें कम दामों पर निजी व्यापारियों को फसल बेचने के लिए मजबूर कर सकती है। जिससे उन्हें अपनी फैसला का सहीं दाम नहीं मिलने का डर भी सता रहा है।