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मध्यप्रदेश में निगम मंडलों की नियुक्तियों में सिंधिया समर्थकों की अनदेखी, बड़ा सवाल क्या BJP में कम हो रहा महाराज का कद?

Scindia supporters ignored in Madhya Pradesh corporation board appointments
भोपाल। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का क्या बीजेपी में कद कम रहा है? क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया की बीजेपी मेंअब पूछ पऱख कम हो गई है? क्या सिंधिया समर्थक अब अपने महाराज से दूरी बना रहे है? क्या मध्यप्रदेश की सरकार के साथ सिंधिया का तालमेल ठीक नहीं है? यह कुछ ऐसे सवाल है जो इन दिनों मध्यप्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा के केंद्र में है।


मध्यप्रदेश की राजनीति में इन अटकलों की वजह निगम मंडलों में सिंधिया समर्थकों की अनेदखी है। मोहन सरकार ने अब तक करीब दो दर्जन निगम मंडलों, आयोग, बोर्ड, प्राधिकरणों में नियुक्तियां की है लेकिन इन नियुक्तियों में सिंधिया समर्थकों को सिरे से दरकिनार कर दिया गया है,वह भी जब इन नियुक्तियों में ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं को बड़े पैमाने पर पदों से नवाजा गया है।

सियासत के जानकार कहते हैं कि 2020 में भाजपा में आने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर-चंबल के एक बड़े नेता माने जाते थे लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद धीमे-धीरे सिंधिया की भाजपा में पूछ पऱख कम होती दिख रही है। हाल में ही नियुक्तियों में जिस तरह से ग्वालियर-चंबल में  सिंधिया समर्थक चेहरों को दरकिनार किया गया, वह इसका साफ संकेत है।

सिंधिया समर्थक नेताओं को बढ़ता इंतजार-साल 2020 में सिंधिया के साथ भाजपा में आए कई दिग्गज नेताओं को पहले उपचुनाव और फिर 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इन नेताओं के राजनीतिक पुर्नवास के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है लेकिन अब तक किसी बड़े चेहरे को जगह नहीं मिल सकी है। विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले सिंधिया की कट्टर समर्थक इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसौदिया, गिर्राज दंडोतिया, रघुराज कंसाना, मुन्नालाल गोयल,रक्षा संतराम सरोनिया जैसे नेताओं को निगम मंडलों में नियुक्तियों आस है लेकिन अब तक उनको मायूसी ही हाथ लगी है।

ऐसे में प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार के भीतर संतुलन साधने की कवायद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों की अनदेखी को लेकर हो रही है। साल 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सिंधिया समर्थकों ने प्रदेश की सत्ता परिवर्तन में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद कई नेताओं को मंत्री पद मिला, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे नेता भी हैं जो अब निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं औऱ लगारा प्रदेश भाजपा दफ्तर में पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात करते नजर आ रहे है।

सिंधिया के सियासी विरोधियों को पद- एक और सिंधिया समर्थकों को निगम मंडलों में नियुक्तियों में दरकिनार कर दिया गया है, वहीं ग्वालियर-चंबल की सियासत में सिंधिया के दो कट्टर विरोधियों केपी यादव और रामनिवास रावत  को बड़े पद से नवाजा गया है। 2018 में लोकसभा चुनाव में सिंधिया को उनके ही गढ़ में  हराने वाले केपी यादव को नागरिक आपूर्ति निगम की जिम्मेदारी देकर उनका कद एक झटके में बढ़ा दिया गया है। बुधवार को केपी यादव के पदभार ग्रहण समारोह में उनका शक्ति प्रदर्शन भी देखने को मिला। वहीं पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को वनविकास निगम की कमान देना भी सिंधिया के लिए एक सियासी संदेश है।


ग्वालियर में सीएम के कार्यक्रम से सिंधिया की दूरी- एक ओर निगम मंडलों में सिंधिया समर्थकों की अनदेखी की जा रही है तो दूसरी ओर पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर के कार्यक्रमों से सिंधिया की दूरी ने भी नई अटकलों को गर्मा दिया है। यह भी तब जब उसी दिन सिंधिया. दिल्ली से वीडियो कॉफेंस के जरिए ग्वालियर एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। जबकि ठीक उसी दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में आरएएस की पहली यूनिवर्सिटी का भूमिपूजन के साथ मेला ग्राउंड में गौपलक सम्मेलन में शामिल हुए। वहीं यह भी गौर करना होगा कि सिंधिया एक तरफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से दूरी बनाई तो दूसरी ओर आए दिन अपने संसदीय क्षेत्र गुना-शिवपुरी को छोड़कर ग्वालियर के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक करते नजर आते है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पार्टी इन दिनों अंचल में पॉवर बैलेंस कर रही है। फिलहाल सभी की नजरें मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में निगम-मंडलों की नई सूची में सिंधिया खेमे को कितनी हिस्सेदारी मिलती है।
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भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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