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50% खराब चमक वाला गेहूं! घबराएं नहीं अन्नदाता, इन्हें भी खरीदेगी हमारी सरकार : मोहन यादव

Madhya Pradesh Chief Minister Dr. Mohan Yadav's Historic Decision Regarding Farmers | Wheat Procurement | Farmers | Madhya Pradesh | Chief Minister Dr. Mohan Yadav | Chief Minister Yadav | Madhya Pradesh Government | Mohan Yadav | Madhya Pradesh News किसानों को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ऐतिहासिक फैसला
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ऐतिहासिक फैसला
- कम विकसित दाने की सीमा 6 से बढ़कर 10 प्रतिशत हुई
- किसान कल्याण के लिए पूर्णतः समर्पित प्रदेश के मुखिया
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसान कल्याण के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। उनके प्रयासों का असर भी दिखाई देने लगा है। उनकी कोशिशों की सफलता का अंदाजा इस निर्णय से लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार अब 50 प्रतिशत खराब चमक वाला गेहूं भी खरीदेगी। इतना ही नहीं, प्रदेश सरकार ने पानी की कमी के कारण कम विकसित दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत, क्षतिग्रस्त दानों की सीमा 6 प्रतिशत बढ़ा दी है। इन फैसलों के पीछे की वजह अन्नदाता को समृद्ध करना है। सीएम डॉ. यादव किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
 
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की समृद्धि के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस फैसले के मुताबिक, अब किसानों को उनकी भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। यह निर्णय किसानों के अधिकारों की रक्षा करेगा और उनके भविष्य को सुरक्षित करेगा। राज्य सरकार ने दलहन, उड़द और तिलहन फसल, सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
उड़द को तय समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोयाबीन की सफलता के बाद सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। इससे सरसों के बाजार भाव में वृद्धि हुई है। किसानों को सरसों का दाम एमएसपी से भी ज्यादा मिल रहा है।
 

आत्मनिर्भर बनेंगे किसान

बता दें, राज्य सरकार साल 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है। इस वर्ष किसानों को मात्र पांच रुपए में कृषि पंप का कनेक्‍शन दिया जा रहा है। सरकार की योजना है कि हमारे किसानों को रात के बदले दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिले। दूसरी ओर, राज्य सरकार की कृषक मित्र योजना में 90 प्रतिशत सब्सिडी पर किसान को सोलर सिंचाई के पंप भी दिए जा रहे हैं। इससे बिजली के मामले में किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।  

मनचाहे स्थानों से मिलेगी खाद

प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.90 लाख मीट्रिक टन है। इसके अलावा अन्य उर्वरक के भी पर्याप्त भंडारण हैं। सरकार ने उर्वरकों की वितरण प्रणाली में भी सुधार किया गया है। नवाचार और तकनीक का उपयोग कर किसानों को अब बिना लाइन लगाए मनचाहे स्थानों से खाद दिलाने की व्यवस्था की गई है।
 

दूध से जरिए बढ़ाएंगे किसानों की आय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं। उनकी योजना के मुताबिक, नई 1752 दुग्ध समितियों का गठन किया गया है। राज्य में रोज दूध का कलेक्शन 10 लाख किलोग्राम से ज्यादा हो गया है। इस तरह अभी तक दुग्ध उत्पादक किसानों को 1600 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

किसानों को अब दूध का दाम प्रति किलो 8 से 10 रुपए बढ़कर मिल रहा है। इसी तरह डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना प्रदेश की महत्वाकांक्षी योजना है इस योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग को 25% एसटीएससी को 33% का अनुदान मिलेगा। 40 लाख रुपए की डेयरी यूनिट लगाने पर राज्य सरकार 10 लाख की सब्सिडी भी देगी।

आर्थिक सहायता बढ़ा रही संपन्नता

मध्यप्रदेश सरकार किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना भी संचालित करती है। यह राज्य सरकार की अहम योजना है, जिसके जरिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6 हजार रुपए की सम्मान राशि दी जाती है। यह 2-2 हजार रुपए की तीन किस्तों में प्रदान की जाती है। ये रकम सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाती है। 
 

8 पॉइंट्स में भी समझें किसान कल्याण की बात

- 3 लाख 96 हजार कृषकों से 16 लाख 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित कर 2 हजार 527 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
- मध्यम-बड़े श्रेणी के 40 हजार 457 कृषकों द्वारा 5 लाख 88 हजार मीट्रिक टन मात्रा के स्लॉट बुक किए गए हैं।
- किसानों को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय की सुविधा दी गई है।
- स्लॉट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी, जरूरत लगी तो और बढ़ा दी जाएगी 
- उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दी गई है।
- गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78  लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है।
- किसानों के लिए मध्यप्रदेश में 3 हजार 516 उपार्जन केन्द्र संचालित हैं।
- कुल 8 लाख 55 हजार कृषकों द्वारा स्लॉट बुकिंग कराई गई है।
Edited By : Chetan Gour
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