भोजशाला फैसले पर कैलाश विजयवर्गीय बोले- यह सनातन आस्था और सांस्कृतिक स्वाभिमान की जीत
धार स्थित भोजशाला को लेकर आए फैसले पर मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने खुशी जताते हुए इसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है।
विजयवर्गीय ने एक्स पर लिखा कि यह फैसला करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपरा के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह क्षण इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में दर्ज होने वाला अविस्मरणीय अवसर है, जिसने समाज को गर्व और आत्मिक आनंद से भर दिया है।
सत्य सनातन धर्म की जय !!!
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) May 15, 2026
हृदय आज गर्व, गौरव और आत्मिक आनंद से परिपूर्ण है। माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के उपरांत धार स्थित भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है।
यह क्षण हम सभी के लिए इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों… pic.twitter.com/CNCjLtCJvs
उन्होंने कहा कि यह निर्णय सत्य, श्रद्धा और इतिहास की पुनर्प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण पल है। विजयवर्गीय ने इसे भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक स्वाभिमान की जीत बताते हुए कहा कि भोजशाला को लेकर वर्षों से चल रही भावनाओं और संघर्ष को इस फैसले से नई पहचान मिली है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है। भोजशाला परिसर में एएसआई का संरक्षण जारी रहेगा। मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है। अदालत ने परिसर को सरस्वती मंदिर करार देते हुए यहां मुसलमानों के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी। Edited by : Sudhir Sharma-

