कैलाश विजयवर्गीय की धार और गणतंत्र दिवस समारोह से दूरी नाराजगी या प्रेशर पॉलिटिक्स?
इंदौर के भागीरथपुरा कांड के बाद मध्यप्रदेश के सियासी गलियारों में सरकार के दिग्गज मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। मोहन कैबिनेट में सबसे सीनियर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जिस तरह सूबे की सियासत में असहज दिखाई दे रहे है, उसे उनकी सरकार से नाराजगी से जोड़़कर देखा जा रहा है। पहले कैबिनेट की बैठकों से कैलाश विजयवर्गीय का अक्सर दूर रहना और अब 10 दिन के लिए पूरी तरह सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहना यानि एक तरह से छुट्टी पर जाने ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है कि क्या कैलाश विजयवर्गीय सरकार में नाराज चल रहे है और अपनी स्थिति से खुश नहीं हैं।
दरअसल गणतंत्र दिवस पर ध्वज फहराने के लिए जारी मंत्रियों की सूची में कैलाश विजयवर्गीय का नाम नहीं होना और धार के प्रभारी मंत्री होने के बाद भी आज जब भोजशाला पर पूरे देश की निगाहें टिकी है तब कैलाश विजयवर्गीय का मौके पर नहीं होना कई तरह की चर्चाओं को जन्म देता है। हलांकि कैलाश विजयवर्गीय के दफ्तर से यह बताया गया है कि पारिवारिक मित्र की पत्नी का निधन के चलते वह 10 दिन किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
2023 के विधानसभा चुनाव के बाद जब डॉ. मोहन यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना कर कैलाश विजयवर्गीय को उनके अधीन मंत्री बनाया गया था, तभी से सियासी गलियारों में यह अटकलें लगाई जाती रही है कि कैलाश विजयवर्गीय भाजपा आलाकमान के इस फैसले से खुश नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के प्रभारी रहे रह चुके कैलाश विजयवर्गीय जब 2023 में एक दशक के बाद प्रदेश की राजनीति में लौटे तो उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उन्हें कोई बड़ा विभाग मिलेगा लेकिन कैलाश विजयवर्गीय जिस विभाग को दशक पहले संभाल चुके थे उन्हें वहीं नगरीय प्रशासन विभाग दिया गया। तब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे अपनी वरिष्ठता के हिसाब से इस पोर्टफोलियो को छोटा मानते हैं।
इन अटकलों को समय-समय पर उस समय और बल मिलता रहा है जब कैलाश विजयवर्गीय सरकार के मंत्री होने के बाद भी प्रदेश के ब्यूरोक्रेसी खासकर इंदौर के अफसरों पर सीधे टिप्पणी करते आए। ऐसा ही एक मौका सरकार के दो साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जब कहा कि वह इंदौर के प्रभारी मंत्री नहीं है तो कैलाश विजयवर्गीय ने दो टूक शब्दों में कहा कि हम तो आपको ही प्रभारी मंत्री समझते थे और इंदौर के अफसर आपके नाम पर धमकाते थे। कैलाश विजयवर्गीय ने साफ कहना कि इंदौर के अधिकारी अधिकारी सुनते नहीं हैं, उनकी नाराजगी माना जा रहा है।
वहीं इंदौर के भागीरथपुरा कांड के बाद तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच चल रही खींचतान को भी सतह पर ला दिया है। इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर स्थानीय विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री होने के नाते कैलाश विजयवर्गीय ने सार्वजनिक तौर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। कैलाश विजयवर्गीय ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से यह दुखद घटना हुई और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीति के जानकर कहते है कि भगीरथपुडा कांड के बाद कैलाश विजयवर्गीय का कैबिनेट की बैठक में नहीं आना लेकिन प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचंना और खुले मैदान में संगठन महामंत्री हितानंद से चर्चा करना, से साफ संकते है कि कैलाश विजवय्गीय एक तरह की प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे है। प्रदेश की राजनिति में इन दिनों मोहन यादव कैबिनेट के विस्तार की अटकलें चल रही है ऐसे में यह देखना होगा कि भविष्य में प्रदेश की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय की क्या भूमिका होगी।