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Last Updated :भोपाल , सोमवार, 25 मई 2026 (14:08 IST)

जल संकट पर मध्‍य प्रदेश सरकार हुई अलर्ट, पेयजल विभागों की छुट्टियां रद्द, CM यादव के निर्देश पर युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू

In view of escalating water crisis in Madhya Pradesh government has gone on alert
Water crisis in Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश में बढ़ते जलसंकट को देखते हुए सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में पेयजल संकट से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 मई को पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी विभागों को पेयजल संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण और प्रतिदिन मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। इस दौरान सरकार ने पेयजल विभागों के अधिकारियों की एक माह की छुट्टियां रद्द कर दी गईं। साथ ही सभी कलेक्टरों को सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाकर खुद जल आपूर्ति की मॉनिटरिंग करने और रोज सुबह समीक्षा बैठक लेने को कहा गया है।

रविवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों, जिला पंचायत सीईओ, नगर निगम कमिश्नरों, पीएचई और जल निगम अधिकारियों के साथ बैठक की। मध्य प्रदेश में बढ़ते जलसंकट को देखते हुए सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में पेयजल संकट से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दौरान सरकार ने पेयजल विभागों के अधिकारियों की एक माह की छुट्टियां रद्द कर दी गईं।
साथ ही सभी कलेक्टरों को सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाकर खुद जल आपूर्ति की मॉनिटरिंग करने और रोज सुबह समीक्षा बैठक लेने को कहा गया है। रविवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों, जिला पंचायत सीईओ, नगर निगम कमिश्नरों, पीएचई और जल निगम अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में प्रदेश के ग्रामीण और मैदानी इलाकों में गहराते जलसंकट पर चर्चा हुई। इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी पानी की कमी को लेकर लोगों का विरोध और आंदोलन सामने आ रहे हैं। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या ज्यादा है वहां तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आ रही जलसंकट की खबरों पर भी तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
 
इसके साथ ही CM हेल्पलाइन पर आने वाली पेयजल संबंधी शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है। बैठक में निर्देश दिए गए कि जहां हैंडपंप खराब हैं जल स्रोतों की मोटर बंद है या पाइपलाइन फूटी हुई है वहां तुरंत मरम्मत कराई जाए। जिन इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई करना जरूरी है वहां पूरी व्यवस्था पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने 1500 करोड़ रुपए जारी किए हैं। पंचायतों को पेयजल संबंधी 10 हजार रुपए तक के कार्य सरल प्रक्रिया के तहत तत्काल कराने के अधिकार भी दिए गए हैं। कलेक्टरों से कहा गया है कि नई एसओपी जारी की गई है, एसओआर को रिवाइज किया गया है और अब जल संधारण के 10 हजार तक के कार्य पंचायत स्वयं कर सकती है।
मुख्य सचिव ने कहा कि 15वां एवं 16वां वित्त आयोग की राशि का भी पेयजल उपलब्धता में उपयोग किया जा सकता है। मुख्य सचिव ने बताया कि केन्द्र वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, मूलभूत मद, अन्य अनुदान जो केन्द्र या राज्य शासन से दिया गया है, के अलावा पंचायत की स्वयं के आय के स्रोतों से भी पेयजल व्यवस्था पर पंचायतें व्यय कर सकती हैं।

उन्होंने कमिश्नर से भी अपने संभाग में विशेष सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा है। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कलेक्टरों से कहा कि वे पेयजल के सभी स्रोतों पर विशेष सतर्कता रखें और पहले से यह जानकारी रखें कि कहीं स्रोत में जल की कोई कमी तो नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक रूप से जल स्रोत की उपलब्धता पर भी पहले से काम करें। दूषित पानी के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
Edited By : Chetan Gour
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