दतिया उपचुनाव: कांग्रेस में टिकट को लेकर सिरफुटौव्वल, अवधेश नायक और घनश्याम सिंह की बयानबाजी से बढ़ी तकरार
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भले ही अब तक बीजेपी और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान नहीं किया हो लेकिन कांग्रेस के अंदर टिकट को लेकर दावेदारों के बीच सिरफुटौव्वल सामने आ गया है। कांग्रेस की चुनाव तैयारियों से जुड़ी बैठक मं संभावित दावेदार अवधेश नायक औऱ घनश्याम सिंह के बीच खुलकर हुई बयानबाजी ने पार्टी के अंदर गुटबाजी को सतह पर ला दिया है।
कांग्रेस की ओऱ से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे बीजेपी से कांग्रेस में आए अवधेश नायक ने टिकट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि, "टिकट कहां जा रहा है, यह सब समझ रहे हैं, मुझे भी अहसास है। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले उन्हें टिकट दिया था, लेकिन दतिया से लेकर भोपाल तक राजेंद्र भारती समर्थकों के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया गया था। वहीं अब उपचुनाव में अवधेश नायक खुलकर टिकट के लिए दावेदारी कर रहे है।
वहीं कांग्रेस की ओर से टिकट के दूसरे प्रमुख दावेदार घनश्याम सिंह ने बैठक में ही अवधेश नायक पर पलटवार करते हुए कहा कि, "टिकट पर पहला हक नायक का ही है, लेकिन आपका दिल बड़ा होना चाहिए"। टिकट को लेकर इन दो बड़े नेताओं के बयान ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को और हवा दे दी है। दतिया राजघराने से आने वाले पूर्व विधायक घनश्याम सिंह भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। हालांकि 2023 में उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद संगठन में उनकी पकड़ और क्षेत्रीय सक्रियता उन्हें दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।
बताया जा रहा है कि दतिया उपचुनाव की तैयारियों को लेकर हुई कांग्रेस की रणनीति बैठक में भी टिकट के दावेदारों के समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई। पार्टी नेतृत्व ने सभी नेताओं से अनुशासन बनाए रखने और अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा तक सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की अपील की है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के बाद संगठन को एकजुट रखना है। यदि असंतुष्ट नेताओं और उनके समर्थकों को समय रहते नहीं साधा गया, तो इसका सीधा असर उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
दरअसल दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसके भीतर ही दिखाई दे रही है। पार्टी में टिकट के कई मजबूत दावेदार सामने हैं, जिससे आंतरिक खींचतान बढ़ गई है। वहीं कांग्रेस आज अपने उम्मीदवार के नाम का एलान कर सकते है।

