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  4. Does the dissolution of the BJP's district executive committee following the defeat in Datia signal the end of Narottam Mishra's politics in the region

दतिया में हार के बाद भाजपा की जिला कार्यकारिणी भंग होना क्या नरोत्तम मिश्रा की दतिया राजनीति के अंत का संकेत?

Defeat in Datia by-election
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद अब एक्शन का दौर शुरु हो गया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने दतिया की जिला कार्यकारिणी, मंडल और मोर्चा इकाइयों को भंग कर दिया। इसके साथ ही चुनावी हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया। नतीजों के बाद यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व ने चुनाव परिणाम को गंभीरता से लिया गया है और पूरे चुनाव के दौरान जिस भितरघात की चर्चा थी उस पर अब पार्टी एक्शन मोड में है।
दतिया भाजपा जिला कार्यकारिणी पर एक तरह से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का कब्जा था, इसका बडा कारण है कि नरोत्तम मिश्रा का लगातार 15 साल तक दतिया से विधायक रहना। इसके साथ नरोत्तम मिश्रा की गिनती मध्यप्रदेश भाजपा के उन दिग्गज नेताओं में होती थी  जिनका प्रभाव सरकार से लेकर संगठन तक में था। 
 
शहर में हार के बाद पार्षदों पर एक्शन की तैयारी-दतिया भाजपा जिला कार्यकारिणी के भंग किए जाने के बाद अब पार्टी उन पार्षदों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई कर सकती है, जिन्होंने चुनाव में पार्टी के विरोध में काम किया है। पार्टी सूत्र बताते है कि  ऐसे करीब एक दर्जन पार्षदों की पहचान की गई है जिनकी गतिविधियां चुनाव में पार्टी के विरोध में रही और उन्होंने वोटिंग के दिन खुलकर पार्टी का विरोध किया। इन पार्षदों को पार्टी नेतृत्व सीधे बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

बताया जा रहा है कि पार्टी के पार्षदों ने पार्टी के विरोध में काम किया, यहीं कारण रहा है कि दतिया शहर में भाजपा को अब तक की सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा। आंकड़े बताते है कि भाजपा दतिया मंडल में साढ़े पांच हजार वोटों से  पीछे रही, वहीं पूरे दतिया शह में भाजपा करीब 11 हजार वोटों से कांग्रेस से पीछे  रही गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव की वोटिंग के दिन पुलिस ने नरोत्तम मिश्रा समर्थक 4 पार्षदों को उनके घरों में  नजरबंद कर दिया था। 
 
क्या नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पार्टी कर पाएगी कार्रवाई?-दतिया उपचुनाव में हार की समीक्षा को लेकर मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर पार्टी की बड़ी बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजदूगी में हुई बैठक में हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा की गई। बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल सरकार के मंत्री, जिन्होंने दतिया उपचुनाव में मंडल जिताने की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होने खुलकर नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी के विरोध में काम करने के आरोप लगाए। 
 
भाजपा से जुड़े सूत्र बताते है कि नरोत्तम मिश्रा की चुनाव में भूमिका को लेकर प्रदेश नेतृत्व एक रिपोर्ट तैयार करके पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भेज रहा है। सूत्र बताते  है कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर कार्रवाई का फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। दरअसल दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को लगभग 6,016 मतों के अंतर से पराजित किया। अब इस हार का पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटता हुआ दिख रहा है। यहीं कारण है कि पहले उनके समर्थक दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया। 
 
दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण भितरघात को माना जा रहा है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शहर में हंगाम और प्रदर्शन किया,  उसने पार्टी को शहर में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। वहीं बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनावी नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।  दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।
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भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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