1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. मध्यप्रदेश
  4. Digvijay Singh vs Jitu Patwari political battle in Madhya Pradesh Congress

मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह बनाम जीतू पटवारी की सियासी जंग, जमीन पर खुलकर आई गुटबाजी

Political battle between Digvijaya Singh and Jitu Patwari within the Madhya Pradesh Congress; factionalism in the MP Congress; infighting over the Veer Bharat Nyas; Digvijaya dismisses Jitu Patwari's allegations as incorrect.मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह बनाम जीतू पटवारी की सियासी जंग
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर बड़े नेताओं के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। इस बार विवाद वीर भारत न्यास को लेकर है, जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने खुलकर गलत ठहरा दिया। पार्टी के दो सीनियर नेताओं के आमने-सामने आने का मामला अब पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है और अब इसका रिएक्शन भी देखने को मिलना शुरु हो गया है। कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के चेयरपर्सन जयराम रमेश ने सोमवार को पीसीसी चीफ जीत पटवारी के एक्स पर किए गए पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि कांग्रेस मुख्यमंत्री के इस्तीफे तक अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगी। 
 
क्या है पूरा मामला?- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पिछले दिनों दिल्ली में हुई प्रेस कॉफ्रेस में आरोप लगाया था  कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को मात्र एक रुपये की टोकन राशि पर दे दी गई। उन्होंने इसे बड़ा भूमि घोटाला बताया और राज्य सरकार को घेरा था।  जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए  थे।

वहीं जीत पटवारी के इन आरोपों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में मीडिया से  बात करते हुए ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए और कहा कि जीतू पटवारी के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि कि वह बिना रिसर्च के कोई बात नहीं करते और सांस्कृतिक संस्था वीर भारत न्यास को जमीन नियमानुसार ही आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन देना हमेशा से एक तय और सही प्रक्रिया रही है। वीर भारत न्यास निजी नहीं बल्कि सरकारी ट्रस्ट है। उनका कहना था कि वीर भारत न्यास एक पंजीकृत सार्वजनिक न्यास है और इसके पदेन अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं। इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि  देश में दलालों की कमी नहीं है। दलालों का काम ही छोटे आरोप लगाना और इसके माध्यम से रुपये वसूली होता है। यह सब खेल दलालों का है। 
 
अपने बयान पर अड़े जीतू पटवारी- वहीं दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भी पीसीसी चीफ जीतू पटवारी अपने आरोपों पर अड़े हुए है। दिग्विजय सिंह के बयान पर जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के नाते वह मुख्यमंत्री से आरोपों पर जवब मांग रहे है और सरकार  को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए वहीं जीतू ने कहा कि  दिग्विजय सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता है और उन्होंने जो कहा वहीं यह बता पाएंगे कि उन्होंने क्यों  कहा।
 
पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं दोनों नेता-यह पहला मौका नहीं है जब दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच मतभेद सामने आ है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद बैठकों की जानकारी नहीं देने पर भी दिग्विजय सिंह ने पटवारी की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाए थे। वहीं दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह को जब जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था तब भी राघौगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीतू पटवारी का पुतला फूंका था। इसके साथ ही पटवारी के नेतृत्व, संगठन की कार्यशैली पर भी दिग्विजय सिंह कई बार सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठा चुके है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े मुद्दें पर प्रदेश कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के आमने-समाने आने से पार्टी एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं और भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का अवसर मिलता है।
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
अगला लेख
CM डॉ. मोहन यादव की राज्यपाल से मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज, कई मंत्रियों की होगी छुट्टी !